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इस जिले में कटान ने मचाई तबाही, गंगा में समा गये एक दर्जन मकान

Ashish Kumar Shukla

Publish: Oct 18, 2019 21:00 PM | Updated: Oct 18, 2019 21:00 PM

Ballia

सूचना के बाद भी नहीं पहुंचा प्रशासन, पीड़ितों में भारी आक्रोश

 

 

बलिया. जिले के दुबे छपरा और रामगढ़ गंगा में उतराती गंगा के कारण कटान ने भयावह रूप धारण कर लिया है। गंगा के किनारे बसे लोगों के लिए ये समय किसी आफत से कम नहीं है। गुरूवार की रात से लेकर शुक्रवार की सुबह तक एक दर्जन से अधिक मकान को गंगा ने निगल लिया। करारों के गिरने की आवजों से लोग पहले से ही दहशत में थे वो रात से ही घर छोड़कर दूर जा बैठे थे। जिस कारण पीड़ित परिवारों की जान बच सकी। हैरानी की बात ये रही कि सूचना के बाद भी शासन- प्रशासन ने सुविधा मुहैया कराने में घोर लापरवाही की। । जिससे पीड़तों में शासन प्रशासन के प्रति आक्रोश बना रहा।

गंगा की तेज लहरों ने केहरपुर के बृजकिशोर ओझा, सुशील ओझा, ललिता ओझा, अनिल कुमार ओझा, संतोष ओझा, विपिन कुमर ओझा, रमेश कुमार ओझा, अमित ओझा, आलोक ओझा, अनूप ओझा, संदीप ओझा, अवधेश ओझा, मनोज ओझा, अरुण ओझा, अवध ओझा सहित कई लोगों के मकान शुक्रवार को कटान तेज होने से अचानक गंगा में समा गया। वहीं गंगापुर में अजय यादव, नंदलाल यादव, गामा तुरहा, संतोष तुरहा, सरिता देवी, पचकौड़ी राम, श्रीकृष्ण राम, तेतर राम, रूपा कोइरी के मकान आज कटान के जद में आकर गंगा में विलीन हो गया।

पीड़ितों का आरोप है कि हम गरीब किसी तरह से मजदूरी करके अपना पालन पोषण कर रहे थे। लेकिन गंगा कि लहरों ने हमें आसमान के नीचे लार खड़ा कर दिया। कटान से भयभीत लोगों ने किसी तरह से भाग-भागकर अपनी जान बचाई। अब पीड़ित परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।

दहशत में हैं लोग

दहशत का माहौल है, लोग अपना सामान लेकर सुरक्षित जगहों पर जहां पलायन कर रहे हैं वहीं अपने ही हाथों से आशियाना उजाड़ने पर विवश हैं। इस बीच उपजिलाधिकरी सदर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर कटान का जायजा लिया और एनएच 31 को बचाने के लिए जरूरी उपाय करने का निर्देश बाढ़ खंड के अधिकारियों को दिया।