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तो अखिलेश यादव की इस चूक के चलते नीरज शेखर ने छोड़ी समाजवादी पार्टी, अमित शाह से की मुलाकात

Mohd Rafatuddin Faridi

Publish: Jul 16, 2019 11:11 AM | Updated: Jul 16, 2019 11:11 AM

Ballia

  • जानिये कौन हैं नीरज शेखर, जिन्होंने छोड़ी है समाजवादी पार्टी, ज्वाइन कर सकते हैं भाजपा।

बलिया . समाजवाद के पुरोधा और युवा तुर्क कहे जाने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के बेटे व समावादी पार्टी से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने सपा छोड़ दी है और उन्होने एक साल पहले ही अपनी राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि अब वह सपा छोड़कर भाजपा में जा सकते हैं। उनके सपा छोड़ते ही अमित शाह के साथ उनकी फोटो भी मीडिया में आ गयी। पिता चन्द्रशेखर के निधन के बाद समाजवादी पार्टी ने उनके बेटे नीरज शेखर को बलिया से पिता की परंपरागत सीट पर टिकट देकर सांसद बनाया था। बलिया से वह दो बार लगातार सांसद बने, लेकिन 2014 की मोदी लहर में हार गए, जबकि 2019 में अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट नहीं दिया। ऐसा कहा जा रहा है कि इसी से नाराज होकर उन्होंने यह फैसला लिया।

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2019 में यह पहला लोकसभा चुनाव था जब चन्द्रशेखर के परिवार से कोई प्रयाशी नहीं था। टिकट न मिलने से तभी से नीरज शेखर नाराज बताए जा रहे थे। अब उन्होंने अचानक ही यह फैसला लेकर राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। उनके बीजेप में जाने की अटकलें लगायी जा रही हैं। नीरज शेखर के बीजेपी ज्वाइन करते ही शायद उन्हें पिता की राजनैतिक विरासत तो मिल जाए, लेकिन वो पिता की समाजवादी विचारधारा से दूर हो जाएंगे। सियासी जानकार नीरज शेखर को टिकट न देकर नाराज करना उनकी गलती मान रहे हैं। उनके मुताबिक इसी एक गलती से समाजवादी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है।

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बलिया की सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर 1977 से लेकर 2004 तक बीच में 1980 को छोड़कर लगातार आठ बार बलिया से सांसद चुने गए। 2007 में उनके निधन के बाद सीट खाली हो गयी। इसके बाद उपचुनाव हुआ तो उनके बेटे नीरज शेखर को समाजवादी पार्टी ने बलिया से टिकट दिया और वो बम्पर वोटों से जीत गए। 2009 में भी नीरज शेखर ने यह जीत बरकरार रखी। 2014 की मोदी लहर में बलिया सीट पहली बार बीजेपी के कब्जे में चली गयी और यहां से भाजपा के भरत सिंह सांसद हो गए। नीरज शेखर को हार का मुंह देखना पड़ा। पर समाजवादी पार्टी ने नीरज शेखर को राज्यसभा भेज दिया। राज्यसभा में उनका कार्यकाल 2020 तक था, पर उसके पहले ही अचानक उन्होंने बीते सोमार को राज्यसभा की सदस्यता और समाजवादी पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया।