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नगर के तालाबों का अस्तित्व खतरे में

Bhaneshwar Sakure

Publish: Nov 17, 2019 19:55 PM | Updated: Nov 17, 2019 19:55 PM

Balaghat

गंदगी, कचरे से अटे पड़े हैं तालाब, धीरे-धीरे सिकुड़ते जा रहा है तालाब का दायरा

बालाघाट. बैहर मुख्यालय में मौजूदा दो प्राचीन तालाबों का अस्तित्व अब खतरे में नजर आ रहा है। नगर परिषद द्वारा न तो तालाब की मरम्मत कराई जा रही है और न ही उसके सौंदर्यीकरण की दिशा में कोई प्रयास किया जा रहा है। जिसके चलते तालाब का दायरा धीरे-धीरे सिकुड़ते जा रहा है।
जानकारी के अनुसार सीढिय़ा सहित एक अन्य तालाब के चारों ओर गंदगी का आलम है। पानी मटमैला हो चुका है। प्लॉस्टिक और अन्य वेस्टज सामग्री से तालाब का पानी दूषित होते जा रहा है। वर्तमान समय में कुछ ही भाग पर पानी नजर आ रहा है। आधे से अधिक भाग में कचरा और गंदगी अटी पड़ी हुई है। जिसके कारण तालाब का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा भी तलाब के सौंदर्यीकरण के नाम से राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए थे। लेकिन आज दिनांक तक उस निर्देश पर कोई अमल नहीं हो पाया। विदित हो कि पूर्व में तालाब की साफ-सफाई होती थी। गहरीकरण का भी कार्य किया जाता था। मौजूदा नगर परिषद अध्यक्ष द्वारा भी तालाब के सौंदर्यीकरण और गहरीकरण की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा हा है। यदि मुख्यालय के इन प्राचीन तालाबों को नहीं बचाया गया तो भविष्य में नगरवासियों को इसके दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।

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