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जंजीर खोल रहे पुलिस अफसर को अम्मा देती रहीं गाली, वो बिना चिढ़े बेड़ियों से दिलाई आजादी

Muneshwar Kumar

Publish: Aug 21, 2019 15:33 PM | Updated: Aug 21, 2019 15:33 PM

Balaghat

पुलिस अधिकारी ने बुजुर्ग महिला को बेड़ियों से दिलाई आजादी, लोग खूब कर रहे तारीफ

बालाघाट. मध्यप्रदेश के बालाघाट में एक पुलिस अधिकारी की मानवीय पहलू सामने आई है। दरअसल, जब लांजी एसडीओपी नितेश भार्गव इलाके में भ्रमण के लिए गए थे तो रास्ते में एक बुजुर्ग महिला को जानवरों की तरह चलते देखा। महिला के दोनों पैर में जंजीर बंधी हुई थी। एसडीओपी ने गाड़ी रुकवाकर महिला की मदद की। उसके बाद उसके परिजनों को बुलाकर उनसे बात की।


दरअसल, एक पुत्र ने अपनी मां के पैरों में जंजीर बांधकर उसे कैद कर दिया। हालांकि, जंजीर के बांधे जाने के बाद भी यह वृद्धा गांव में भ्रमण करती थी। पैरों में जंजीर बंधे होने के कारण वह चौपाए की तरह घूमती-फिरती थी। जिसके कारण उसे काफी तकलीफ होती थी। इस तकलीफ से वृद्धा को तीन वर्ष बाद आजादी मिल गई है। यह आजादी उसे लांजी एसडीओपी नितेश भार्गव ने दिलाई है।

 

अब आजाद
इधर, जंजीरों से आजादी मिलने के बाद अब वृद्धा खुलकर न केवल घूम-फिर रही है। बल्कि सामान्य जीवन भी जी रही है। मामला जनपद पंचायत लांजी के ग्राम पंचायत बेलगांव का है। बेलगांव निवाली कैतिन बाई परिजनों द्वारा पिछले तीन वर्षों से जंजीरों में कैद करके रखा था। आलम यह है कि वृद्धा के पैरों में जंजीर के निशान भी आ गए हैं।

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पैरों और हाथों पर टेककर चलती थी
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बेलगांव निवासी कैतिन बाई को उसके पुत्र विनोद ने पिछले दिन वर्षों से पैरों में जंजीर बांधकर रखा था। जिसके कारण उसे चौपाए की तरह घूमन-फिरना पड़ता था। इतना ही नहीं ढलती उम्र में भी वह चौपाए की तरह अपने पैरों और दोनों हाथों को टेककर चलती थी।

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क्षेत्र दौरे के दौरान एसडीओपी नितेश भार्गव ने देखा
19 अगस्त को जब लांजी एसडीओपी नितेश भार्गव उस इलाके के भ्रमण पर थे, तब उन्होंने इस वृद्धा को चौपाए की तरह चलते देखा। एसडीओपी ने तत्काल गाड़ी रोकी और वृद्धा ने पुलिस को गालियां भी दी, लेकिन एसडीओपी ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

 

मानसिक स्थिति सही नहीं
ग्राम पंचायत बेलगांव सरपंच की मानें तो कैतिन बाई के परिवार में एक पुत्र और बहू है। पुत्र विनोद के पास आय के अन्य साधन नहीं है। वह मजदूरी का कार्य करता है। कैतिन बाई की मानसिक स्थिति सही नहीं है। उसे यह भी याद नहीं रहता कि वह कहां और किस दिशा में जा रही है, वह क्या कर रही है। इस कारण उसके बेटे को काफी परेशान रहना पड़ता है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए पुत्र विनोद ने अपनी मां के पैरों में जंजीर बांध दी थी, वह ज्यादा दूर न जा सके। वहीं, शाम के समय उसे खोल दिया जाता है। यह सिलसिला काफी दिनों से चला आ रहा है।

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वहीं, लांजी एसडीओपी नितेश भार्गव ने कहा कि गांव भ्रमण के दौरान एक वृद्धा के पैरों में जंजीर बंधी दिखी, जिसे अलगा कराया गया। इस मामले की सूचना लांजी एसडीएम को भी दी गई है। परिजन से जंजीर बांधने के संबंध में जानकारी ली जा रही है।