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अति वर्षा, बाढ़ से जिले की 6958 लोग हुए प्रभावित

Bhaneshwar Sakure

Publish: Sep 15, 2019 21:18 PM | Updated: Sep 15, 2019 21:18 PM

Balaghat

बाढ़ प्रभावितों के सर्वे का कार्य पूरा, 156 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान

बालाघाट. जिले में 8-9 सितम्बर को हुई भारी बारिश और वैनगंगा नदी में पिछले दिनों आई बाढ़ के कारण जिले की 6958 की जनसंख्या प्रभावित हुई है। इस प्राकृतिक आपदा से 156 लाख रुपए का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावितों के सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। वहीं प्रभावितों को अब शीघ्र मुआवजा देने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
जानकारी के अनुसार भारी बारिश और वैनगंगा नदी में बाढ़ आने से 6958 लोग प्रभावित हुए थे। जिसमें 428 लोगों को राहत शिविरों में रखकर उनके भोजन सहित अन्य व्यवस्थाएं की गई थी। वर्तमान समय में गर्रा में 50 लोग अभी भी राहत शिविर में रह रहे हैं। बाढ़ व अति वर्षा के कारण जिले के 665 किसानों की 325 हेक्टेयर क्षेत्र की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस फसल का नुकसान लगभग 32 लाख 50 हजार रुपए आंका गया है। अतिवृष्टि एवं बाढ़ के कारण बालाघाट जिले के 762 कच्चे मकान आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं और 22 पशुओं की हानि भी हुई है। बाढ़ एवं अतिवृष्टि के कारण जिले के 6 छोटे पुलों और 12 सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है। 6 पुलों को के क्षतिग्रस्त होने पर करीब 60 लाख रुपए और 12 सड़कों के क्षतिग्रस्त होने पर करीब 45 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इस तरह से बाढ़ एवं अतिवृष्टि के कारण बालाघाट जिले में लगभग 156 लाख रुपए का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।
विदित हो कि इस प्राकृतिक आपदा से लोगों का जनजीवन काफी अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ से प्रभावित लोंगों द्वारा अभी भी अपने गृहस्थी को जुटाने में लगे हुए है। भले ही सरकारी मदद मिल जाए, लेकिन ये मदद उनके जीवन को अपने मूल स्वरुप में नहीं लौटा सकती। वहीं कलेक्टर दिपक आर्य ने पूर्व में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कुम्हारी का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने प्रभावितों के मकानों को हुई क्षति और अन्य नुकसान का शीघ्र ही सर्वे कराए जाने व नियमों के अनुसार सभी पात्र लोगों को शासन की ओर से राहत राशि प्रदान करने का आश्वासन भी दिया था। राहत राशि सीधे प्रभावित लोगों के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। बाढ़ से जिन लोगों के मकान के गिर चुके और जिनके रहने का ठिकाना नहीं हैं उनके रहने के लिए राहत शिविर में व्यवस्था करने, जिन लोगों के मकान पूरी तरह से गिर गए हैं उन्हें राशन व जनसहयोग से कपड़ेे दिलाने के लिए प्रशासन द्वारा मदद करने, प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविर लगाकर दवा का वितरण करने सहित अन्य बातें कही थी।