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प्रशिक्षण के नाम पर व्यापारियों से लिए जा रहे १२ सौ रूपए

Mukesh Yadav

Publish: Aug 22, 2019 20:56 PM | Updated: Aug 22, 2019 20:56 PM

Balaghat

व्यापारियों ने जताया विरोध, एसडीएम तक पहुंचा मामला

वारासिवनी. स्थानीय गुरूनानक धर्मशाला में उस समय उहापोह की स्थिति निर्मित हो गई जब बाहर से आए एक एनजीओं संगठन के द्वारा 12 सौ रुपए के एवज में व्यापारियों को प्रशिक्षण देने की कवायद करते देखा गया। व्यापारियों एवं दुकानदारों के विरोध के बाद अनुविभागिय अधिकारी राजस्व के संज्ञान में उक्त मामला लाया गया। इसके बाद अनुविभागिय अधिकारी ने तहसीलदार को भेजकर मामले की जांच करवाई। वैसे स्थानीय जागरूक नागरिकों की मांग है कि इस मामले को कलेक्टर संज्ञान में लेकर जांच करवानी चाहिए।
प्राप्त जानकारी अनुसार धर्मशाला में छोटे दुकानदारों व्यापारियों एवं होटल व्यवसायियों को ग्लोबल इंस्टीट्यूट फोर एजुकेशन एंड रिसर्च फोंडेशन के द्वारा प्रशिक्षण के नाम पर 12 सौ रुपए लिए जा रहे थे। इसके बाद दुकानदारों एवं व्यवसायियों ने इसका यह कहकर विरोध किया कि संबंधित विभाग अथवा प्रशासन की ओर से हमें कोई लिखित सूचना एवं जानकारी नही दी गई है। मात्र फोन करके हमें बुलवाया गया है और हमसे 12 सौ रुपए किस बात के लिए जा रहे हैं, जबकी एनजीओं के द्वारा कोई अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर युक्त पक्की सील थप्पे वाली रसीद भी नहीं दी जा रही है। वही यह प्रशिक्षण निजी भवन में आयोजित किया गया है और कोई शासकीय अधिकारी उपस्थित नही है। कुछ दुकानदारों ने इसे अवैध वसूली करार दिया। दुकानदारों का कहना है कि हमने नियमानुसार ऑन लाईन पंजीयन कराया है, जिसकी अनिवार्य निर्धारित शुल्क भी जमा किया है फिर प्रशिक्षण के नाम पर छोट - बड़े दुकानदारों एवं व्यवसायियों से एक समान 12 सौ रुपए लेना कहां तक उचित है। अगर विभाग को प्रशिक्षण देना है तो लायसेंस देने के पहले ही प्रशिक्षण देना चाहिए।
वर्सन
भारतीय खाद्य संरक्षा प्राधिकरण भारत सरकार द्वारा 2017 आदेशानुसार एफओएसटीएसी के तहत यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खाद्य से संबंधित सभी व्यवसायियों को यह प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। फूड सेफ्टी प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें प्रमाण प्रत्र दिया जाएगा। हमारे द्वारा जिला खाद्य अधिकारी को सूचना दी जा चुकी है।
अमित कुमार सिंग, प्रशिक्षण दाता सदस्य

जांच में सही पाये गये दस्तावेज - तहसीलदार - एसडीएम के निर्देश पर मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में दस्तावेज सही पाए गए हैं।
कैलाश कन्नौज, तहसीलदार