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भारी बारिश से टूटी सडक़ें, 13 किमी लंबा चक्कर लगाकर गांव जा रहे लोग

Ramakant Dadhich

Publish: Aug 06, 2019 23:21 PM | Updated: Aug 06, 2019 23:21 PM

Bagru

साढ़े पांच बजे फिर से बारिश शुरू हुई जो देर शाम तक जारी रही। इससे गली-मोहल्लों व सडक़ों पर पानी बह निकाला। वहीं खेत-खलिहान बारिश के पानी से लबालब हो गए। इधर, मुंडरू के नांगल-अजीतगढ़ सडक़ मार्ग पर तेज बहाव से सडक़ बह गई और करीब दस फीट लंबा व छह फीट गहरा गड्ढा हो गया।

चौमूं. शहर में मंगलवार दोपहर बाद मेघ मेहरबान हुए। इससे पूर्व सुबह से ही आकाश मे बादल छाए रहे। दोपहर बाद करीब 1.30 बजे काली घटाएं छा गई और करीब एक घंटे तक झमाझम बारिश हुई। इसके बाद साढ़े पांच बजे फिर से बारिश शुरू हुई जो देर शाम तक जारी रही। इससे गली-मोहल्लों व सडक़ों पर पानी बह निकाला। वहीं खेत-खलिहान बारिश के पानी से लबालब हो गए। यहां नगरपालिका के सामने, बस स्टैंड, थाना मोड़, सुभाष सर्किल, बस स्टैंड, हरिजन मोहल्ला, मोरीजा रोड, रेलवे स्टेशन के सामने सहित कई निचले इलाकों में पानी भरने से वाहन चालकों व राहगीरों को आवागमन में परेशानी हुई। इधर, मुंडरू के नांगल-अजीतगढ़ सडक़ मार्ग पर तेज बहाव से सडक़ बह गई और करीब दस फीट लंबा व छह फीट गहरा गड्ढा हो गया।

जी का जंजाल बना अंडरपास


शहर के चौमूं-सामोद रेलवे स्टेशन के पास खादीबाग रोड पर बना बना अंडरपास वाहन चालकों और राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। जयपुर-रींगस तक मीटरगेज से ब्राडगेज लाइन के आमान परिवर्तन को लेकर इस दूरी में निर्माण किए सभी रेलवे अंडरपासों में पानी निकासी के समुचित प्रबंध नहीं होने से अंडरपास में बारिश का पानी भर जाता है। जिसका खमियाजा आसपास की ढाणियों व दूर-दराज के गांवों में आने-जाने वाले वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी हुई।

पानी निकासी के नहीं है पुख्ता इंतजाम


नगरपालिका प्रशासन व जेडीए द्वारा शहर में मुख्य चौराहों व तिराहों पर बारिश के पानी की निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं करने से झमाझम बारिश होते ही इन जगहों पर पानी का भराव हो जाता है। यहां बस स्टैंड, मोरीजा रोड तिराहा, थाना मोड़, सुभाष सर्किल आदि स्थानों पर तेज बारिश में पानी का भराव होने से वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है।

 

नांगल-आसपुरा सडक़ मार्ग पर बन गया गहरा गड्ढा


मूडंरू. नांगल क्षेत्र में सोमवार देर रात इन्द्र देव जमकर बरसे, तेज बरसात से चारों ओर पानी ही पानी हो गया मकानों में पानी आ गया, खेत में पानी भरने से खड़ी फसल पानी में डूब गई। बरसाती पानी के तेज बहाव के कारण सडक़ बह गई,सडक़ बहने व पानी से रास्ते बंद होने के कारण स्कूल बसें नहीं चली। सोमवार देर रात करीब डेढ़ घंटे तक जमकर बरसात हुई। इससे विद्युत आपूर्ति बंद रहने के साथ ही नांगल-अजीतगढ़ सडक़ मार्ग पर तेज बहाव से सडक़ बह गई और करीब दस फीट लंबा व छह फीट गहरा गड्ढा हो गया। वहीं नांगल क्षेत्र में मंगलवार सुबह बरसात के पानी से टूटी आसपुरा सडक़ को पंचायत की सूचना के बाद भी सानिवि ने दोपहर बाद तक ठीक नहीं करवाया, वाहन चालक जोखिम लेकर सडक़ से गुजरते रहे। दोपहर बाद तीन बजे आसपुरा की तरफ से आ रहा ट्रक चालक सडक़ के बीच से टूटने के बारे में अनजान था, ऐसे में ट्रक गड्ढे में धंस गया। गनीमत रही कि ट्रक चालक की सतर्कता से पलटने से बच गया। ट्रक घंसने से सडक़ मार्ग पूरी तरह बंद हो गया व नांगल से आसपुरा दो किमी जाने वाले दुपहिया वाहनों को भी १३ किमी लंबा चक्कर लगाकर तिलोकपुरा होकर जाना पड़ा।

टाटियावास टोल प्लाजा पर पानी भरा, रेंग-रेंग कर चले वाहन


रामपुरा-डाबड़ी. कस्बे सहित क्षेत्र में मंगलवार दोपहर बाद हुई बारिश से जगह-जगह पानी भर गया, जिससे वाहन चालकों के साथ राहगीरों को आवागमन में परेशानी हुई। वहीं चौमूं-जयपुर राजमार्ग स्थित टाटियावास टोल प्लाजा पर लाइनों में वाहनों रेंग-रेंग कर चले। यदि टोल प्रबन्धन द्वारा टोल से बांडी नदी तक नाला बना दिया जाए तो टोल सडक़ का पानी बांडी नदी में गिर सकता है। जिससे यहां पानी भरने से निजात मिल सकती है।

निचले इलाकों व रेलवे अंडरपास में भरा बरसाती पानी


गोविंदगढ़. कस्बे सहित आसपास क्षेत्र में मंगलवार को हुई बारिश के बाद निचले इलाकों व रेलवे अंडरपास में बरसाती पानी भर गया। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार जयपुर सीकर रेलवे लाइन के नीचे बने अंडरपास 119, 120, 121, 122, 123,124 बरसाती पानी के कारण भर गए। गोविंदगढ़-कालाडेरा मार्ग पर बने रेलवे अंडरपास 120 में बरसाती पानी करीब 5 फीट भर गया। जिससे साधनों का आवागमन बंद हो गया।
कालाडेरा. कस्बे व आसपास के गांवो में मंगलवार को चौथे दिन भी मेघ जमकर बरसे। दोपहर एक बजे मेघ गर्जन के साथ बारिश का शुरू हुआ सिलसिला सांय तक चला। इस दौरान कहीं तेज तो कही हल्की बारिश हुई। जिससे खेत पानी से लबालब हो गए। वहीं सडक़ें व कच्चे रास्ते दरिया बन गए।