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Audit: निगम ने उपभोक्ताओं को दिवाली से पहले दिया करंट

Teekam Saini

Publish: Oct 22, 2019 23:26 PM | Updated: Oct 22, 2019 23:26 PM

Bagru

Audit of electricity corporation...28 लाख का बकाया निकाला, 557 उपभोक्ताओं पर लटकी तलवार

कोटपूतली (Audit). विधुत वितरण निगम (electricity corporation) के बिजली बिलों की तीन साल पहले की ऑडिट जांच में साढ़े पांच सौ से अधिक उपभोक्ताओं से कम राशि वसूलने के प्रकरण सामने आए हैं। ऑडिट टीम (Audit) ने ऐसे उपभोक्ताओं के करीब 28 लाख रुपए की राशि बकाया (dues) निकाली है। ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा होने के बाद निगम प्रशासन ने उपभोक्ताओं के बिलों में ऑडिट राशि जोड़कर भेजना शुरू कर दिया है। इधर, जेब पर अचानक पड़े अतिरिक्त आर्थिक भार के कारण उपभोक्ताओं की नींद उड गई है।
त्यौहारी उत्साह के रंग में भंग
दीपावली की तैयारियों के बीच इस अनचाही मुसीबत से उपभोक्ताओं का उत्साह ठंडा पड़ गया। आर्थिक मंदी और त्यौहारी खर्चों के चलते पहले से ही परेशान लोगों को ऑडिट (Audit) रिपोर्ट ने मुश्किल में डाल दिया है। कई लोगों के 50 हजार रुपए से अधिक की भी बकाया (dues) राशि निकाली गई है। ऐसे लोग पूरे साल का बजट बिगडऩे और दीपावली का मजा किरकिरा होने की चिंता में डूबे हैं।
गलती निगम की
जानकारी के मुताबिक गत दिनों निगम (electricity corporation) की ऑडिट टीम ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के रिकॉर्ड की जांच की है। इसमें करीब 557 उपभोक्ताओं से बिजली बिलों में निर्धारित से कम राशि जमा होना सामने आया है। निगम द्वारा बिल बनाते समय टैरिफ गलत लगाने, गलत एवरेज, रीडिंग कम, नगर पालिका सेस आदि भूलचूक के चलते गलत बिल जारी होने के कारण निगम को कम राशि का भुगतान हुआ। ऑडिट (Audit) के दौरान उपभोक्ताओं के रिकॉर्ड खंगालने में ऐसी गलतियां पकड़ में आने पर वास्तविक राशि का आंकलन किया गया। राशि के अंतर को वसूलने के लिए उपभोक्ताओं को नोटिस जारी किए गए और अब बिल में राशि जोड़ी गई है।
हो सकता है समाधान
निगम (electricity corporation) के एईएन सुरेशचंद गर्ग ने बताया कि उपभोक्ताओं को ऑडिट जांच से शिकायत होने पर सुनवाई का प्रावधान है। 25 हजार रुपए तक के विवादित मामले एक्सईएन की अध्यक्षता में गठित समझौता समिति के समक्ष 118 रुपए शुल्क के साथ आवेदन किए जा सकते हैं। इससे ऊपर के मामले 295 रुपए शुल्क के साथ अधीक्षण अभियंता व इससे ऊपर के अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समझौता समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं। समिति सुनवाई के बाद नियमानुसार फेरबदल के लिए अधिकृत है।