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रेलवे ई-टिकट के अवैध कारोबार का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

Ashish Kumar Shukla

Publish: Nov 16, 2019 20:30 PM | Updated: Nov 16, 2019 20:30 PM

Azamgarh

39 लाख 32 हजार 881 रुपये के 1869 ई-टिकट बरामद

आजमगढ़. रेलवे के ई-टिकट के अवैध कारोबार से पर्दा उठ गया है। आईआरसीटीसी दिल्ली के एंटी फ्राड सेल से आनलाइन संपर्क कर क्राइम ब्रांच ने करीब एक सप्ताह तक निगरानी की। इसके बाद शुक्रवार की देर रात उसे कामियाबी मिली। फ्राड करने वाले साफ्टवेयर में हेराफेरी कर कुछ सेकेंड पहले ही कन्फर्म टिकट निकाल लेते थे और उसे 1500 रूपये अधिक कीमत में देते थे। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

छापेमारी के दौरान आरोपितों के पास से दो लैपटाप, एक प्रिटर, तीन मोबाइल फोन, दो एसबीआइ व एक यूबीआइ के एटीएम कार्ड, तीन पासबुक, चेक आदि के अलावा 12440 रुपये भी बरामद किया गया। साथ ही 39 लाख 32 हजार 881 रुपये के 1869 ई-टिकट बरामद हुए।

डीजी आरपीएफ रेलवे बोर्ड दिल्ली अरुण कुमार के निर्देश पर आइजी आरपीएफ गोरखपुर मंडल अतुल श्रीवास्तव, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त लखनऊ अमित मिश्रा, मंडल सुरक्षा आयुक्त वाराणसी ऋषि पांडेय की देखरेख में लखनऊ आरपीएफ क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अमित कुमार राय, एसआइ कैलाश प्रसाद, कौशल कुमार शुक्ला, गणेश प्रसाद सिंह, राकेश धर दुबे, एएसआइ रामबृक्ष व सुमित खरवार पिछले एक सप्ताह से इस अवैध कारोबार की सुराग में लगे थे।

शुक्रवार को पुख्ता जानकारी के बाद अधिकारियों ने जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के अंजान शहीद स्थित गुप्ता ट्रैवेल सर्विस में छापेमारी की। इस दौरान मौके से विजय कुमार गुप्ता व दुर्गा प्रसाद गुप्ता पुत्रगण महंगू प्रसाद निवासी अंजान शहीद को गिरफ्तार किया गया। जबकि रतन लाल गुप्ता पुत्र राम अवतार गुप्ता, आजम, संतोष कुमार गुप्ता व तारिक निवासी फूलपुर, इलाहाबाद को वांछित किया गया। इस दौरान पहले से बने टिकटों के लिए यात्रियों को फर्जी पहचान पत्र बनाकर उपलब्ध कराने संबंधी सबूत भी प्रकाश में आए।

जांच के दौरान टिकट बनाने वाले लैपटाप में प्रतिबंधित साफ्टवेयर एएनएमएस पर टिकट बनाना पाया गया था। छापेमारी के दौरान आरोपितों के पास से दो लैपटाप, एक प्रिटर, तीन मोबाइल फोन, दो एसबीआइ व एक यूबीआइ के एटीएम कार्ड, तीन पासबुक, चेक आदि के अलावा 12440 रुपये भी बरामद किया गया। साथ ही 39 लाख 32 हजार 881 रुपये के 1869 ई-टिकट बरामद हुए। बताया जाता है कि ई-टिकट लखनऊ के फर्जी पते से 62 गलत आइडी बनाकर प्रतिबंधित साफ्टवेयर से बनाया जा रहा था। किसी भी नाम से बनाया जा रहा टिकट जरूरत मंद लोगों को पहले के बने नाम से फर्जी पहचान पत्र बनाकर उपलब्ध करा दिया जाता था।

गिरोह के सदस्य मुंबई व फूलपुर, इलाहाबाद के कुछ बड़े दलालों के साथ मिलकर साफ्टवेयर में गड़बड़ी कर कुछ सेकेंड पहले ही कंफर्म टिकट निकाल लेते थे। प्रति यात्री टिकट मूल्य के अलावा 01हजार से 1500 रुपये अतिरिक्त वसूला जाता था। दोनों आरोपितों को आदर्श रेलवे स्टेशन स्थित आरपीएफ प्रभारी राशिद बेग मिर्जा के हवाले कर दिया गया। आरपीएफ प्रभारी ने दोनों आरोपितों को मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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