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जिस जिले में दिये कई राष्ट्रीय अन्तराष्ट्रीय खिलाड़ी वहीं खिलाडियों के भविष्य से खेल रही सरकार

Mohd Rafatuddin Faridi

Publish: Sep 18, 2019 16:51 PM | Updated: Sep 18, 2019 16:51 PM

Azamgarh

खेल शुरू नहीं हुआ और खंडर में तब्दील हो गये लाखों की लागत से बने तीन स्टेडियम।

आजमगढ़. जिले ने देश को कई राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी दिये। क्रिकेट हो या फिर कुश्ती अथवा बैडमिंटन खिलाड़ी जिले का ही नहीं बल्कि देश का नाम रोशन कर रहे है लेकिन यहां खेल को बढ़ावा देने के लिए आज तक जो भी प्रयास हुए उसे अधिकारियों की लापरवाही और सरकारों की उपेक्षा ने गर्त में पहुंचा दिया। जिला मुख्यालय पर स्थित स्टेडियम में संसाधनों का आभाव तो है ही ग्रामीण अंचलों के स्टेडियम का हाल तो कोई पूछने वाला भी नहीं है। लालगंज तहसील क्षेत्र में बने तीन स्टेडियमों की हालत देख तो यही लगता है कि वर्तमान सरकार भी इसके प्रति गंभीर नहीं है। परिणाम है कि संसाधन के आभाव प्रतिभाएं आगे बढ़ने का अवसर नहीं पर रही है।


लालगंज तहसील की तीनों स्टेडियम देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। इसकी चहारदीवारी नही हैं। स्टेडियम के मैदान में घास-फूस उग आए हैं। स्टेडियम कैंपस में जंगली जानवरों ने अपना आशियाना बना रखा है। आजमगढ़ जनपद में ग्रामीण स्टेडियम सिर्फ तीन हैं। यह जिला मुख्यालय जिला युवा कल्याण अधिकारी के दफ्तर में दर्ज है। जनपद के ग्रामीण तीनों स्टेडियम सिर्फ लालगंज तहसील में ही स्थित हैं। पहला स्टेडियम लालगंज के श्रीकांतपुर में है। इसका निर्माण वर्ष 2006 में हुआ था। इसकी लागत 38 लाख थी। दूसरा स्टेडियम मेहनाजपुर थाना क्षेत्र के चिल्लूपुर गांव में बना बना है। इसका निर्माण 2010 में हुआ था। स्टेडियम की लागत 44 लाख रुपये आई थी। तीसरा स्टेडियम मेहनाजपुर थाना क्षेत्र के चिवटेहरा गांव में है। इसका निर्माण 2015 में हुआ था। इसकी लागत 85 लाख आई थी।


यह तीनों स्टेडियम दुर्दशा का दंश झेल रहे हैं। इसके निर्माण में करोड़ों सरकार का खर्च हुआ हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इसकी उपयोगिता नहीं के बराबर रह गई है। देखरेख के अभाव में स्टेडियम खंडहर में तब्दील हो रहा है। इसकी चहारदीवारें गिर रही हैं। स्टेडियम के मैदान में घास-फूस उग आए हैं। स्टेडियम के कैंपस में जंगली जानवरों ने अपना आशियाना बना रखा है जबकि स्टेडियमों में खेलकूद सामग्री के नाम पर शासन से पैसा मिलता है। स्टेडियम की टूट-फूट की मरम्मत के नाम पर निदेशालय से धन आवंटित भी होता है। स्टेडियमों पर पीआरडी के जवान चैकीदार के रूप में रखे गए हैं जो इनकी देखभाल और सुरक्षा करते हैं। चिल्लूपुर गांव के सुरेंद्र पाल व रामनगर के राकेश पांडेय ने बताया कि यहां कोई प्रशिक्षु भी तैनात नहीं है। कागजों में चैकीदार रखे गए हैं जिनका मौके पर पता नहीं चलता।

By Ran Vijay Singh