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BATLA HOUSE: बड़े पर्दे पर रिलीज हुई बटला हाउस, जानिए यूपी के आजमगढ़ से क्या है कनेक्शन

Sarweshwari Mishra

Publish: Aug 17, 2019 14:42 PM | Updated: Aug 17, 2019 14:42 PM

Azamgarh

2008 में हुआ था बटला हाउस एनकाउंटर

 

 

आजमगढ़. बटला हाउस मूवी रिलीज होने के बाद एक बार फिल्म बटला हाउस एनकाउंटर की चर्चा होने लगी है। 13 सितम्बर 2008 में दिल्ली के करोल बाग, कनाट प्लेस, इंडिया गेट और ग्रेटर कैलाश में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। इस ब्लास्ट में 30 लोग मारे गए थे, जबकि 133 घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया था कि बम ब्लास्ट को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया है। इस ब्लास्ट के बाद 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बटला हाउस के एक मकान में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम अलर्ट हो गई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन सीरियल बम धमाकों की जांच कर रही थी। इसी के चलते वो टीम उस दिन बाटला हाउस में एल-18 नंबर की इमारत की तीसरी मंजिल पर जा पहुंची। वहीं पर पुलिस की इंडियन मुजाहीदीन के संदिग्ध आतंकियों से मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में दो संदिग्धों की मौत हो गई थी। मरने वालों की पहचान मोहम्मद आतिफ अमीन और साजिद के रूप में हुई थी। दोनों यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले थे। जबकि मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया था। एक युवक मौके से किसी तरह से भाग निकला था। बाटला हाउस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के होनहार इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गए थ।

 

 

21 सितंबर 2008 को 14 लोगों को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
21 सितम्बर को पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एल-18 मकान की देखभाल करने वाला भी शामिल था। गिरफ्तारियां दिल्ली और उत्तर प्रदेश से की गई थीं। इस दौरान मानवाधिकार संगठनों ने बाटला हाउस एन्काउंटर को फेक बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि इसकी न्यायिक जांच की जाए. इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को जांच कर दो महीने में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। 22 जुलाई 2009 में जांच के बाद एनएचआरसी ने बाटला हाउस एनकाउंटर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी और दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दी थी। 26 अगस्त 2009 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बाटला हाउस एनकाउंटर की न्यायिक जांच से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट को ही सही माना था। 30 अक्टूबर 2009 को कुछ लोगों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी सारे पहलुओं को जानने के बाद न्यायिक जांच से मना कर दिया था। 19 सितंबर, 2010 इस दिन बाटला हाउस एनकाउंटर के दो साल पूरे हुए थे। तभी ख़बर आई कि जामा मस्जिद के पास मोटर साइकिल सवारों ने विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाकर फायरिंग की थी। इस गोलीबारी में दो ताईवानी नागरिक घायल हो गए थे। जिस जगह पर फायरिंग की वरदात को अंजाम दिया गया था, उसी से चंद कदमों की दूरी पर पार्क एक कार से अचानक धुंआं निकलने लगा और कार में आग लग गई। पुलिस ने उस इलाके को खाली कराया। कार में बम प्लांट किया गया था, जो किसी वजह से ब्लास्ट नहीं हुआ था। 6 फरवरी 2010 को बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद से ही पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के कातिल को तलाश कर रही थी। आखिरकार 6 फरवरी 2010 को लंबी भागदौड़ के दिल्ली पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा के हत्या आरोपी शहजाद को गिरफ्तार कर लिया था। 20 जुलाई, 2013 इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के कातिल शहजाद अहमद के मामले में कोर्ट ने 20 जुलाई 2013 को सुनवाई पूरी कर ली। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया था। 25 जुलाई, 2013 फैसला सुरक्षित रखने के पांच दिनों के बाद अदालत ने इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की हत्या के मामले में शहजाद अहमद को दोषी करार दे दिया था। 30 जुलाई, 2013 अदालत ने शहजाद अहमद को इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के कत्ल के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।