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इस बाहुबली के बेटे को मंत्री बना अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ाएगी बीजेपी

Sarweshwari Mishra

Publish: Aug 18, 2019 13:58 PM | Updated: Aug 18, 2019 13:58 PM

Azamgarh

केशव मौर्या का भी माना जाता है करीबी, पार्टी के प्रति समपर्ण और पिता से मनमुटाव का मिल रहा लाभ

आजमगढ़. लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत और विधायकों के सांसद चुने जाने क बाद खाली हुए मंत्री पद तथा सीएम की अध्यक्ष और राज्यपाल से मुलाकात के बाद योगी सरकार के मंत्रीमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गयी। सूत्रों की माने तो कभी भी मंत्रीमंडल का विस्तार किया जा सकता है। ऐसे में चर्चा इस बात की है कि किसका प्रमोशन होगा और किसका डिमोशन। सर्वाधिक चर्चा आजमगढ़ की है जहां से पार्टी के पास मात्र एक विधायक है। माना जा रहा है कि बीजेपी कांग्रेस के बाहुबली रमाकांत यादव को नीचा दिखाने और यादव मतों को अपने पक्ष में करने के लिए अरूणकांत यादव को मंत्री बना सकती है। इससे अखिलेश यादव की भी टेंशन बढ़नी तय है। कारण कि एक तरफ निरहुआ यादवों को बीजेपी की तरफ गोलबंद कर सपा की परेशानी बढ़ा रहे है ऐेसे में अरूण भी मंत्री बने तो परेशानी और बढ़नी तय है।
बता दें कि अरूणकांत यादव के पिता पूर्व सांसद रमाकांत यादव चार बार विधायक और इतनी ही बार सांसद रहे है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में रमाकांत ने मुलायम सिंह यादव को जीत के लिए नाको चने चबवा दिये थे। 2019 के चुनाव में बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो रमाकांत यादव कांग्रेस में शामिल हो गए और भदोही से चुनाव लड़ें। कांग्रेस को उम्मीद थी कि यह बाहुबली कुछ गुल जरूर खिलाएगा लेकिन रमाकांत यादव बड़ी मुश्किल से 25 हजार मत हासिल कर सके। इसके बाद कुछ दिन पूर्व रमाकांत यादव की वाई श्रेणी सुरक्षा भी हटा ली गयी।

 


रहा सवाल अरूण यादव का तो वे पिता की पार्टी से बगावत के दौरान भी शांत रहे और पार्टी के प्रति निष्ठा जताते रहे। लोकसभा चुनाव में उन्होंने खुलकर बीजेपी का साथ दिया। अरूण को डिप्टी सीएम केशव मौर्य का करीबी भी माना जाता है। रमाकांत के जाने के बाद पार्टी में यादव नेताओं की कमी भी है। रमाकांत और अरूणकांत के पारिवारिक कारणों से संबंध भी अच्छे नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी अरूण कांत को मंत्री बनाकर एक तीर से दो शिकार करेगी। एक तो मंत्री बनने के बाद पिता पुत्र की दूरी और बढ़ेगी, भविष्य में अरूण के रमाकांत के साथ खड़े होने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी साथ ही पार्टी यादव मतों को भी अपने पक्ष में कर पाएगी। अगर अरूण कांत मंत्री बनते हैं तो रमाकांत के परिवार के पहले व्यक्ति होगें जिन्हें किसी सरकार में मंत्रालय मिलेगा। रमाकांत चार बार विधायक और इतनी ही बार सांसद जरूर रहे लेकिन सपा, बसपा ने उन्हें कभी मंत्री नहीं बनाया। यहीं नहीं उनके भाई उमाकांत यादव भी कभी मंत्री नहीं बन पाए है।

BY-Ranvijay Singh