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तो अब इस तरह से सपा-बसपा के वोटबैंक में सेंधमारी की तैयारी कर रही भाजपा

Ashish Kumar Shukla

Publish: Dec 07, 2019 14:21 PM | Updated: Dec 07, 2019 14:21 PM

Azamgarh

दो माह में कम से कम आठ बार एक बूथ पर जाएंगे नेेता, गांवों में करेंगे प्रवास, पिछड़ों के साथ ही अल्पसंख्यकों पर भी है पार्टी की नजर, मोर्चा संभालेंगे बड़ी जिम्मदारी

आजमगढ़. महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद सत्ता से दूर हुई भाजपा अब एक बार फिर संगठन के दमपर विपक्ष को मात देने की कवायद में जुट गयी है। अब बीजेपी सहयोगियों के भरोसे सत्ता हासिल करने की कोशिश नहीं करेगे बल्कि खुद पूर्ण बहुमत हासिल करने की कोशिश करेंगी। पार्टी की सीधी नजर सपा बसपा के वोट बैंक पर है। पार्टी अति पिछड़ों और अति दलितों को अपने पाले में करने का प्रयास पहले से ही कर रही है अब अल्पसंख्यकों को विपक्ष से दूर करने के प्लान पर काम चल रहा है। इसके लिए पार्टी ने ग्राम स्वराज अभियान शुरू किया है जो एक दिसंबर को शुरू हुआ और महात्मागांधी के निर्वाण दिवस यानि 30 जनवरी तक चलेगा।

इस अभियान के तहत बीजेपी संगठन के साथ ही पार्टी की विभिन्न मोर्चो की अलग अलग जिम्मेदारी सौंपी गयी है। ग्राम स्वराज अभियान के तहत मोर्चो के पदाधिकारियों को गांव आवंटित किए गये है। अब नेता आवंटित गांवों में सभी बूथों पर प्रवास करेंगे। इन्हें दो माह में कम से कम आठ बार प्रत्येक सप्ताह उसी गांव में जाना है। कार्यकर्ताओं को कम से कम दो रात्रि बूथों पर प्रवास भी करना है। बूथों पर प्रवास के दौरान नेता बूथ समिति के साथ बैठक करेंगे। केन्द्र व प्रदेश सरकार की पाकेट बुक कार्यकर्ताओं को देंगे। इस दौरान वे बूथ पर सामाजिक समीकरणों की जानकारी लेगें।

गांवों में केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं प्रधानमंत्री आवास, शौचालय उज्जवला, किसान ऋण माफी योजना, सौभाग्य योजना, पेंशन आयुष्मान कार्ड आदि के बारें में लोगों से चर्चा करेंगे और लाभार्थियों से घर घर जाकर सम्पर्क करेंगे। इस दौरान लाभार्थिययों का विचार भी लिया जाएगा। गांव के प्रभावी मतदाता, युवा, महिला, किसान वरिष्ठजन, प्रधान, बीडीसी, शिक्षक, अधिवक्ता, रिटायर्ड अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मिलकर केन्द्र व प्रदेश सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करने के साथ ही उनके सुझाव नोट करेंगे। फिर फीडबैक उपर भेजा जाएगा। शीर्ष नेतृत्व इसपर काम करेगा।

यहीं नहीं गांधी संकल्प यात्रा में जिन गांवों में पदयात्रा नहीं हुई थी उन गांवों पर पार्टी का विशेष फोकस है। साथ ही यहां जातीय समीकरण पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा। प्रयास होगा कि अधिक से अधिक ऐसे लोग पार्टी से जोड़े जाय जो दूसरे दलों या उनकी नीतियों से प्रभावित है।

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