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मुलायम अखिलेश की छोड़िए सीएम योगी भी इस मामले में हुए फेल, जानिये पूरा मामला

Mohd Rafatuddin Faridi

Publish: Sep 17, 2019 15:24 PM | Updated: Sep 17, 2019 15:24 PM

Azamgarh

योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार दावा करती है कि उसकी सरकार में पिछली सरकारों से ज्यादा विकास हुआ है।

आजमगढ़. जिले का एक मात्र महिला अस्पताल मरीजों का उपचार क्या करेगा जब उसकी खुद की सेहत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। इस अस्पताल की नींव वर्ष 1991 में मुलायम सिंह ने रखी फिर अखिलेश ने सीएम रहते इसे लेकर बड़े बड़े दावे किये लेकिन कोई भी यहां मानक के अनुरूप चिकित्सक तक तैनात नहीं कर सका। वर्ष 2017 में सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ भी इसका दो दौरा कर चुके है लेकिन आज नौबत यह है कि अस्पताल कि बिजली सत्तर लाख बकाया के चलते कभी भी काटी जा सकती है। अस्पताल प्रबंधन बच्चों की जिंदगी का रोना रोकर और मानवता का हवाला देकर पिछले कई महीनों से बिजली विभाग को कार्रवाई से रोक कर रखे है लेकिन अब विद्युत विभाग राहत देने के मूड में नहीं दिख रहा।


बता दें कि जनपद की आबादी पचास लाख से अधिक है। आजमगढ़ पूर्वांचल का एक मात्र जिला है जहां आज भी पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक। प्रति एक हजार पुरूष पर 1018 महिलाएं है। यानि यहां महिलाओं की संख्या 28 लाख के आसपास है। महिला स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए वर्ष 1991 में मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रहते जिला महिला अस्पताल की नीव रखी थी। बिल्डिंग तो बन गयी लेकिन यहां कभी मानक के विपरीत चिकित्सक तैनात नहीं हुए। 2012 में यूपी का सीएम बनने के बाद अखिलेश यादव ने भी बड़े-बड़े दावे किए लेकिन अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए कदम नहीं उठाया। वर्ष 2017 में बीजेपी सत्ता में आयी तो योेगी आदित्यनाथ सीएम बने। उन्होंने आजमगढ़ को प्राथमिकता वाला जिला बताते हुए इस अस्पताल का दौरा किया उस समय उन्हें समस्याओं से अवगत कराया गया। यहीं नहीं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह भी इस अस्पताल का दौरान किए। उनके सामने भी डाक्टरों की कमी, बकाया बिजली बिल और खराब एनआईसीयू का मामला उठाया गया लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

आज हालत यह है कि बिजली का बकाया बिल बढ़ कर 70 लाख हो गया है। विभाग चार बार अस्पताल प्रबंधन को नोटिस दे चुका है। दो बार विभाग की टीम कनेक्शन विच्छेदन के लिए जा चुकी है लेकिन बच्चों और महिलाओं का जीवन खतरे में न पड़े इसलिए अस्पताल प्रबंधन की गुजारिश पर बिजली नहीं काटा लेकिन अब विभाग पर राजस्व वसूली का दबाव बढ़ने लगा है। ऐसे में विभाग के लोग कभी भी कनेक्शन काट सकते है।


अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम अरविद सिंह का कहना है कि सीएम को चार नोटिस के बाद चेतावनी भी जारी की जा चुकी है। मामला मरीजों से जुड़ा होने के कारण अब तक बिजली नहीं काटी गयी थी लेकिन बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है। सीएमएस डा. अमिता अग्रवाल बजट का रोना रो रही है लेकिन विभाग पर भी राजस्व वसूली का प्रेशर है। अब हम राहत देने की स्थिति में नहीं है इसलिए कड़ा रुख अपनाते हुए महिला अस्पताल की विद्युत विच्छेदित करने का निर्णय लिया है। जल्द विद्युत बकाया जमा नहीं किया जाएगा तो विद्युत सप्लाई बंद कर दी जाएगी।


सीएमएस डा. अमिता अग्रवाल का कहना है कि बजट के लिए आधा दर्जन बार शासन को लिखा गया लेकिन बजट आया ही नहीं । जब बजट आयेगा तभी तो हम बिजली का बिल जमा करेंगे। बीच में एक बार 10 लाख रूपये का बजट आया था वह हमने विद्युत विभाग को दे दिया था लेकिन फिर बजट नहीं आया, आते ही भुगतान किया जाएगा।