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मासूम से दुष्कर्म पर कोर्ट ने पहली बार लिया ऐतिहासिक फैसला, 9 दिन रोज सुनवाई कर सुनाई ऐसी सजा, कांप जाएगी हर दरिंदे की रूह

Akansha Singh

Publish: Aug 30, 2019 11:13 AM | Updated: Aug 30, 2019 11:13 AM

Auraiya

जिले में एक चार वर्षीय को आखिरकार न्याय मिल ही गया। लगातार नौ दिनों तक सुनवाई होने के बाद दुष्कर्म आरोपी को उम्रकैद की सजा हुई। विशेष न्यायाधीश पाक्सो राजेश चौधरी ने आरोपित को दोषी करार दिया और 9 वें दिन उम्रकैद की सजा सुनाई।

औरैया. जिले में एक चार वर्षीय को आखिरकार न्याय मिल ही गया। लगातार नौ दिनों तक सुनवाई होने के बाद दुष्कर्म आरोपी को उम्रकैद की सजा हुई। विशेष न्यायाधीश पाक्सो राजेश चौधरी ने आरोपित को दोषी करार दिया और 9 वें दिन उम्रकैद की सजा सुनाई। उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना किया गया है। यह फैसला उत्तर प्रदेश का इतिहास बन गया, क्योंकि घटना के महज 28 दिन में दोषी को सजा सुना दी गई। वादी ने पुलिस को जानकारी दी कि उनकी बेटी चार साल की है और आंगनबाड़ी में पढ़ती है। घटना के दिन वह स्कूल में लंच के दौरान पड़ोसी श्यामवीर के घर के पास खेल रही थी। तभी श्यामवीर बच्ची को अपने घर ले गया और उससे दुराचार किया। वहां जोॆ कुछ भी हुआ वह सारी बात बच्ची ने अपनी मां को बताई। उसके बाद जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपित को जेल भेज दिया था। मामले में विवेचक ने महज 20 दिन में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हो गई।

एक दिन में हुई तीन-तीन गवाही

विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो जितेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि एक दिन में तीन-तीन गवाही हुई। नौ गवाहों के बयान दर्ज कर न्यायालय ने सजा सुना दी। जेल में निरुद्ध श्यामवीर को इटावा जेल भेज दिया गया था। 40 पेज के फैसले में न्यायालय ने यह आदेश भी दिया है कि जुर्माने की रकम पीड़िता को उसके इलाज में हुए खर्च व पुनर्वासन के लिए दी जाए। दोषी श्यामवीर के इस कुकृत्य के कारण परिवारीजन ने भी पैरवी नहीं की। निर्णय के समय वादी व दोषी, दोनों पक्ष से कोई भी न्यायालय में मौजूद नहीं था। बताते हैं कि इस मामले में एक गवाह बारिश के चलते फंस गया था। इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक सुनीति को हुई तो उन्होंने उसके लिए तुरंत गाड़ी भेजी और उसे बुलवाकर कोर्ट में गवाही के लिए प्रस्तुत किया। इस मामले में पुलिस की तेजी ने भी त्वरित निर्णय में अदालत की मदद की। श्यामवीर की ओर से कोई वकील नहीं था। उसकी पैरवी के लिए न्यायमित्र प्रीती गुप्ता को शासन ने अधिकृत किया था। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो जितेंद्र सिंह तोमर व एडीजीसी चंद्रभूषण तिवारी की बहस सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुना दिया।

यूं चली कार्रवाई

01 अगस्त : घटना हुई और बेला थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।
20 अगस्त : पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
28 अगस्त : आरोपित को दोषी करार दिया गया।
29 अगस्त : अदालत ने रोजाना सुनवाई के बाद सजा सुनाई।