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नाग पंचमी 2019 विशेष : देश के इन प्राचीन मंदिरों में मिलती है कालसर्प दोष से मुक्ति!

Deepesh Tiwari

Publish: Aug 05, 2019 11:01 AM | Updated: Aug 05, 2019 11:24 AM

Astrology and Spirituality

श्रावण मास sawan mas के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी nag panchami ...

भोपाल। सावन/श्रावण मासsawan mas के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी nag panchami के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है।

इस बार श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि 5 अगस्त यानि सावन के तीसरे सोमवार को पड़ रही है,ऐसे में 2019 में नाग पंचमी का पर्व इसी दिन मनाया जा रहा है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार मान्यता है कि नाग देवता की नागपंचमी पर पूजा करने से जातक को उनकी कृपा प्राप्त होती है और सर्प से किसी भी प्रकार की हानि का भय दूर हो जाता है।

ज्योतिष में नाग को केतु का कारक माना गया है। वहीं ज्योतिष में कालसर्प दोष को भी नाग की आकृति का माना जाने के चलते इसके निवारण के लिए नाग मंदिरों में पूजा का विधान भी है। ऐसे में भारत में नागों से जुड़े कई प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। जहां पर कालसर्प दोष / योग की विशेष पूजा की जाती है।

Trimbakeshwar: Nashik

त्र्यंबकेश्वर : नासिक
यह मुख्य रूप से नाग मंदिर नहीं होने के बावजूद भगवान शंकर के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में एक होने के कारण इस मंदिर में भी कालसर्प दोष की पूजा की जाती है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्थान आठवां है। यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। इसके समीप ब्रह्म गिरि पर्वत है, जहां से गोदावरी नदी निकली है। मंदिर के अंदर एक छोटे से गड्ढे में तीन छोटे-छोटे-लिंग है, ब्रह्मा, विष्णु और शिव- इन तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर काले पत्थरों से बना है। इस मंदिर में कालसर्प शांति, त्रिपिंडी विधि और नारायण नाग बलि की पूजा संपन्न होती है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर : उज्जैन

देश के प्रसिद्ध नाग मंदिरों में सबसे पहले बात करते हैं जो देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक महाकाल मंदिर के परिसर में स्थित है। नाग देवता के इस मंदिर की खासियत है कि यह साल में केवल एक बार आम लोगों के दर्शन के लिए खोला जाता है। महाकाल मंदिर के तीसरी मंजिल पर भगवान शंकर और माता पार्वती फन फैलाए नाग के सिंहासन पर विराजमान हैं। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन इस तक्षक नाग के ऊपर विराजमान शिव-पार्वती के दर्शन मात्र से कालसर्प दोष दूर हो जाता है।

Nag Vasuki Temple: Prayagraj

नाग वासुकी मंदिर : प्रयागराज

प्रयागराज में संगम के पास ही दारागंज क्षेत्र में नाग वासुकी का मंदिर स्थित है। नाग वासुकी मंदिर को शेषराज, सर्पनाथ, अनंत और सर्वाध्यक्ष कहा गया है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां नागपंचमी के दिन दर्शन और पूजन से कुंडली का कालसर्प दोष दूर हो जाता है। नाग पंचमी के दिन यहां एक बड़ा मेला लगता है।


तक्षकेश्वर नाथ : प्रयागराज

प्रयागराज स्थित तक्षकेश्वर नाथ का मंदिर यमुना नदी के किनारे स्थित है। इस अति प्राचीन मंदिर वर्णन पद्म पुराण के 82 पाताल खंड के प्रयाग माहात्म्य में 82वें अध्याय में मिलता है। मान्यता है कि कि इस मंदिर में भगवान शिव के दर्शन से न सिर्फ व्यक्ति का बल्कि उसकी आने वाली पीढ़ी का भी सर्पभय दूर हो जाता है।

Takshkeshwar Nath: Prayagraj

मन्नारशाला : केरल

केरल के अलेप्पी जिले से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर स्थित मन्नारशाला मंदिर एक नहीं, दो नहीं बल्कि 30 हजार नागों वाला मंदिर है। 30 हजार नागों की प्रतिमाओं वाला यह मंदिर 16 एकड़ में हरे-भरे जंगलों से घिरा हुआ है। नागराज को समर्पित इस मंदिर में नागराज तथा उनकी जीवन संगिनी नागयक्षी देवी की प्रतिमा स्थित है।

नागलोक के नाश से पहले, नागों के राजा वासुकी ने अपनी बहन की करा दी थी शादी...

हिन्दू धर्म में नागों की खास पूजा की जाती है। और इन्हें देवताओं के रूप में पूजा भी जाता है। हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक सावन के पावन माह की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी मनाया जाता है। इस बार यह उत्सव 5 अगस्त को मनाया जाएगा।

ऐसे हुई नागों की उत्पत्ति...
इस धरती पर नागों की उत्पत्ति कैसे हुई इसके बारे में हमारे ग्रंथों में बताया गया है। इनमें वासुकि, शेषनाग,तक्षक और कालिया जैसे नाग हैं। नागों का जन्म ऋषि कश्यप की दो पत्नियों कद्रु और विनता से हुआ था।

1.शेषनाग- शेषनाग का दूसरा नाम अनन्त भी है। शेषनाग ने अपनी दूसरी माता विनता के साथ हुए छल के कारण अपनी माता को छोड़कर गंधमादन पर्वत पर तपस्या की थी। तब तपस्या कारण ब्रह्राजी ने उन्हें वरदान दिया था। तभी से शेषनाग पृथ्वी को अपने फन पर संभाले हुए है। धर्म ग्रंथो में लक्ष्मण और बलराम को शेषनाग के ही अवतार माना गया है। शेषनाग भगवान विष्णु के सेवक रुप क्षीर सागर में रहते हैं।

2. वासुकि नाग- नाग वासुकि को समस्त नागों का राजा माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार समुद्रमंथन के समय नागराज वासुकि को रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया था। त्रिपुरदाह यानि युद्ध में भगवान शिव ने एक ही बाण से राक्षसों के तीन पुरों को नष्ट कर दिया था। युद्ध के समय वासुकि शिव धनुष की डोर बने थे।

नाग वासुकि को जब पता चला कि नागकुल का नाश होनेवाला है और उसकी रक्षा इसके भगिनीपुत्र द्वारा ही होगी तब इसने अपनी बहन जरत्कारु को ब्याह दी। इस तरह से उन्होनें सापों की रक्षा की, नहीं तो समस्त नाग उसी समय नष्ट हो गये होते।

3. तक्षक नाग- तक्षक नाग के बारे में महाभारत में एक कथा है। उसके अनुसार श्रृंगी ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग ने राजा परीक्षित को डसा था जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। तक्षक से बदला लेने के उद्देश्य से राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने सर्प यज्ञ किया था। इस यज्ञ में अनेक सर्प आ-आकर गिरने लगे। तब आस्तीक मुनि ने तक्षक के प्राणों की रक्षा की थी। तक्षक ही भगवान शिव के गले में लिपटा रहता है।

4. ककोंटक नाग- कर्कोटक शिव के एक गण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार,अपनी माता के शाप से बचने के लिए सारे नाग अलग-अलग जगहो में यज्ञ करने चले गए। कर्कोटक नाग ने ब्रह्राजी के कहने पर महाकाल वन में महामाया के सामने स्थित शिवलिंग की पूजा की। शिव ने प्रसन्न होकर कहा- जो नाग धर्म का आचरण करते हैं, उनका विनाश नहीं होगा।

5. कालिया नाग- कालिया नाग यमुना नदी में अपनी पत्नियों के साथ निवास करते थे। उसके जहर से यमुना नदी का पानी भी जहरीला हो गया था। इसको लेकर भगवान कृष्ण और कालिया में भयंकर युद्ध हुआ था। हारने के बाद कालिया नाग ने यमुना को छोड़ दिया था।