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रहस्यमय स्थान: जहां अष्टभैरव की पहरेदारी कर रहीं हैं नौ देवियां

Deepesh Tiwari

Publish: Jan 05, 2019 17:30 PM | Updated: Jan 05, 2019 17:31 PM

Astrology and Spirituality

सदियों से अष्ट भैरव व नौ दुर्गा इस शहर को सुरक्षित रखे हुए हैं!

भोपाल। देश दुनिया में आप कहीं भी चले जाएं, हर जगह जहां भी देवी के मंदिर होंगे। वहां भैरव ही माता की सुरक्षा में लगे दिखते हैं या यूं कहें कि देवी मंदिर बीच में और भैरव मंदिर चारों ओर होते हैं। लेकिन क्या आप जानते है कि एक ऐसा शहर भी है, जहां अष्ट भैरव मौजूद है और इनके चारों ओर नौ देवियां विराजती है।


दरअसल हिन्दू-मान्यताओं के अनुसार देवी मां के मंदिर के पास भैरव का मंदिर माता की सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। वहीं कुछ इन्हें देवी मां का द्वारपाल भी मानते हैं। मान्यता के अनुसार देवी मंदिरों पर एक भैरव की नियुक्ति की जाती है।

 

जी हां, देश ही नहीं दुनिया का एकमात्र शहर ये है उत्तरांचल का अल्मोड़ा। मंदिरों के इस शहर को कुमाऊं का शीशफूल भी कहा जाता है। कुमाऊं का सबसे प्राचीन शहर अल्मोड़ा सांस्कृतिक व एतिहासिक दृष्टि से खासा नाम रखता है।

मान्यता के अनुसार काषाय पर्वत की चोटी पर बसे इस शहर की खासी विशेषता है कि यह दैवीय शक्तियों से परिपूर्ण है। जो चहुंओर से अष्ट भैरव व नव दुर्गा मंदिरों से घिरा है। मान्यता है कि सदियों से अष्ट भैरव व नौ दुर्गा इस शहर को सुरक्षित रखे हुए हैं। आपदाओं के वक्त ये दैवीय शक्तियां शहर को सुरक्षित निकाल लेती हैं। साथ ही शहर में स्थित अष्ट भैरवों के चारों ओर पहाडियों पर देवी मां के मंदिर इन भैरवों की पहरेदारी करते प्रतीत होते हैं।

 

 

इन्हीं देवी मंदिरों में से एक हैं कसार देवी का मंदिर जिसकी 'असीम' शक्ति से नासा के वैज्ञानिक भी हैरान हैं। दरअसल यह मंदिर अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र भी हैं। जहां दुनिया का सबसे अधिक चुम्कत्व पाया गया है।

इस संबंध में नंदा देवी मंदिर के पंडित लीलाधर जोशी का कहना है कि इस एतिहासिक व सांस्कृतिक नगरी में अष्ट भैरव व नव दुर्गा लोगों की हर आपदा व संकट से उबारते हैं। यही वजह है कि चाहे बासंतिक नवरात्र हो या शारदीय, इनमें लोग पूरे भक्तिभाव से विशेष पूजा अर्चना करते हैं। इसके अलावा वर्षभर इन मंदिरों में पूजा-पाठ का क्रम अनवरत चलता रहता है।


यहां देवी मां चारों दिशाओं में विविध रूपों में विराज मान हैं। पर्यटन के रूप में विकसित नहीं हो पायी सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा-संस्कृति, परम्परा व ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे कुमाऊं में अल्मोड़ा का विशिष्ट स्थान है। यहां नौ दुर्गा के मंदिरों में हर साल सैकड़ों भक्त पहुंचते हैं।


कहा जाता है कि अल्मोड़ा शहर को बसाने वाले चंद राजाओं ने इसे जहां भौतिक रूप से सुरक्षित बनाया, वहीं दैवीय शक्तियों से भी चारों दिशाओं से सुरक्षित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कभी चंद राजाओं की राजधानी रही अल्मोड़ा नगरी की चारों दिशाओं मेंं विघ्न विनाशक भगवान गणेश स्थापित हैं।

विपदाओं को हरने के लिए अष्ट भैरव...
यही नहीं नगर की रक्षा के लिए अष्ट भैरव विपदाओं को हरने के लिए हर पल मौजूद हैं। प्रदेश में यहीं नौ दुर्गाओं के मंदिर भी स्थापित हैं। वहीं अल्मोड़ा के चारों ओर की चोटियों व नगर में विभिन्न रूपों में शक्ति स्वरूपा देवी माताएं रक्षा कर रही हैं। माता के नौ रूपों का वर्णन पुराणों व धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है।


इसके अलावा नगर में भी अलग-अलग स्थानों पर मां कई रूपों में विद्यमान हैं। इसे अल्मोड़ा नगरी का सौभाग्य ही कहा जाएगा कि अल्मोड़ा के चारों ओर रहने वाले वाशिंदों को प्रात: उठते ही हर दिशा में शिखरों पर स्थित मां के दर्शन होते हैं।


मान्यता है कि सदियों से अष्ट भैरव व नौ दुर्गा इस शहर को सुरक्षित रखे हुए हैं। आपदाओं के वक्त ये दैवीय शक्तियां शहर को सुरक्षित निकाल लेती हैं।

ईश्वरीय शक्ति लैस शहर!...
दूसरे शब्दों में कहें तो अल्मोड़ा की रक्षा चारों ओर से देवी-देवता करते हैं। नगर के चारों ओर नजर डालें तो कलेक्टे्रट के ठीक सामने मां बानड़ी देवी (विंध्यवासिनी), पीछे की ओर स्याही देवी (श्यामा देवी), बायीं ओर कसार देवी, पश्चिम दिशा की ओर मां दूनागिरी आदि विराजमान है।

वहीं नगर में चंद राजाओं की कुल देवी मां नंदा-सुनंदा, मां त्रिपुरा सुन्दरी, मां उल्का देवी, मां शीतला देवी, मां पाताल देवी, मां कालिका देवी, मां जाखन देवी जागृत अवस्था में हैं। कहा जाता है कि अष्ट दुर्गा और नौ भैरवों की वजह से यह नगरी महफूज है।

किसी भी प्रकार का अनिष्ट से यह नौ दुर्गा और भैरव इस शहर की सुरक्षा करते हैं। शहर के काने कोने और चारों दिशाओं में विराजमान यह मंदिर लोगों के अगाध श्रद्धा के केन्द्र हैं।

भैरव के आठ मंदिर...
कहा जाता है कि यहां के लोक देवता भोलानाथ के क्रोध को दूर करने के लिए ज्ञान चन्द के शासनकाल में फिर से भैरव के आठ मंदिर, शिव का एक रूप बनाया गया। जो इस प्रकार हैं :-

1. काल भैरव
2. बटुक भैरव
3. शाह भैरव
4. गढ़ी भैरव
5. आनंद भैरव
6. गौर भैरव
7. बाल भैरव
8. खुत्कुनिया भैरव

 

अल्मोड़ा में विराजमान हैं अष्ट भैरव...
- अष्ट भैरवों की छत्र छाया में है अल्मोड़ा
- चारों दिशाओं में स्थापित हैं मंदिर, विपदाओं से अष्ट भैरवकरते हैं रक्षा
- अल्मोड़ा चंद राजाओं के वंशज बालोकल्याण चंद ने 1563 ईसवीं में अल्मोड़ा को यूं ही कुमाऊं की राजधानी नहीं बनाया।

कहा जाता है कि इसके पीछे यहां के पौराणिक महत्व को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। अल्मोड़ा नगर की महत्ता, विशिष्टता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह नगर नवदुर्गा व अष्ट भैरवों की छत्र छाया में अपने स्थापना काल से ही रहा है।

एक नगर में अष्ट भैरव, नवदुर्गा के मंदिर बिरले ही देखने को मिलते हैं। इसीलिए अल्मोड़ा को अपने विशिष्ट सांस्कृतिक, अध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के पंडित देवकी तिवारी के अनुसार कहा जाता है कि जहां भैरव विराजमान होते हैं वहां अनिष्ट, दु:ख दरिद्रता की छाया निकट नहीं आती। यहां तो अष्ट भैरव विराजमान हैं, जिसके कारण अल्मोड़ा नगरी प्रदेश, देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय मंच में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। इसे लोग अष्ट भैरव व नवदुर्गा का ही आशीर्वाद मानते हैं।

यहां हम अल्मोड़ा नगर के अष्ट भैरवों का जिक्र कर रहे हैं। अष्ट भैरवों के नाम में लोकबोली का अपना पूरा प्रभाव है। यही कारण है कि स्थानीय बोली भाषा के आधार पर अष्ट भैरवों के नाम प्रचलित हैं। नगरवासी भैरवों को अपना ईष्टदेव मानते हैं।

कहां कौन से भैरव?...
नगर के उत्तर दिशा में प्रवेश द्वार पर खुटकुणी भैरव का ऐतिहासिक मंदिर है। जाखनदेवी के समीप भैरव का मंदिर है, जो अष्ट भैरव में एक है। इसी प्रकार लाला बाजार के पास शै भैरव मंदिर है। जिसका निर्माण चंदवंशीय राजा उद्योत चंद ने कराया था।

बद्रेश्वर मंदिर से पूरब की ओर अष्ट भैरवों में एक भैरव शंकर भैरव के नाम से आसीन हैं। थपलिया मोहल्ले में गौड़ भैरव का मंदिर स्थापित है। चौघानपाटा के समीप अष्ट भैरवों में एक मंदिर बाल भैरव का है। यह मंदिर भी चंद राजाओं के काल का बताया जाता है।

पल्टन फील्ड के पास गढ़ी भैरव विराजमान हैं, जो दक्षिण दिशा के प्रवेश द्वार पर रक्षा के लिए स्थापित किए गए हैं। पल्टन बाजार में ही अष्ट भैरवों में बटुक भैरव का मंदिर बना है। रघुनाथ मंदिर के समीप तत्कालीन राजमहल के दक्षिण की ओर काल भैरव मंदिर स्थापित है।

इसी क्रम में बिष्टाकुड़ा के समीप अष्ट भैरव में एक प्राचीन भैरव मंदिर की स्थापना भी चंदवंशीय राजाओं के काल की मानी जाती है। एडम्स इंटर कालेज के समीप भी एक भैरव मंदिर है। इसे भी अष्ट भैरवों में एक बाल भैरव नाम से उच्चारित किया जाता है।

यूं तो पूरे नगर में भगवान भैरव के 10 मंदिर विभिन्न स्थानों में हैं। कुछ बुजुर्गों का कहना है कि दो मंदिर निजी तौर पर बनाए गए हैं। यूं तो भैरव मंदिर में दु:खों के निवारण, अनिष्ट का हरण करने की कामना से लोग रोज मत्था टेकने जाते हैं, लेकिन शनिवार को भैरव मंदिरों में खासी भीड़ रहती है।

ये हैं प्रमुख देवी मंदिर...
1. बानडी देवी मंदिर (विंध्यवासिनी):
बानडी देवी मंदिर अल्मोड़ा-लामगडा रोड पर अल्मोड़ा से 26 किलोमीटर दूर स्थित है। हालांकि, 26 किमी से बाद, लगभग दस किलोमीटर तक ट्रेक करना पड़ता है और इसलिए इस मंदिर तक पहुंचने में बहुत मुश्किल है। अष्टकोणीय मंदिर में शेशनाग मुद्रा के साथ विष्णु की एक प्राचीन मूर्ति है, अर्थात् चार सशस्त्र विष्णु शेशनाग पर सो रहे हैं।

2. नंदा देवी मंदिर :
नंदा देवी मंदिर का निर्माण चंद राजाओं द्वारा किया गया था।देवी की मूर्ति शिव मंदिर के डेवढ़ी में स्थित है और स्थानीय लोगों द्वारा बहुत सम्मानित है। हर सितंबर में, अल्मोड़ा नंदादेवी मेला के लिए इस मंदिर में हजारों हजारों भक्तों की भीड़ रहती हैं,मेला 400 से अधिक वर्षों तक इस मंदिर का अभिन्न हिस्सा है।

3. कासार देवी मंदिर :
कासार देवी उत्तराखंड के अल्मोड़ा के पास एक गांव है। यह कासार देवी मंदिर, कासार देवी को समर्पित एक देवी मंदिर के लिए जाना जाता है, जिसके बाद यह स्थान भी नामित किया गया है। मंदिर की संरचना की तारीखें 2 शताब्दी सीई की हैं, 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद ने कासार देवी का दौरा किया और कई पश्चिमी साधक, सुनिता बाबा, अल्फ्रेड सोरेनसेन और लामा अनागारिक गोविंदा यहाँ आ चुके हैं।

 

1960 और 1970 के दशक में हिप्पी आंदोलन के दौरान यह एक लोकप्रिय स्थान था, जो गांव के बाहर, क्रैंक रिज के लिए भी जाना जाता है, और घरेलू और विदेशी दोनों ही ट्रेकर्स और पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है।

4. त्रिपुरासुंदरी मंदिर:

जिला मुख्यालय स्थित त्रिपुरा सुंदरी देवी का मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। मंदिर में यूं तो साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है। आश्रि्वन मास की शारदीय नवरात्र में यहां देश के विभिन्न प्रांतों से लोग पूजा-अर्चना को पहुंचते हैं।

लोकमान्यता है कि जो भी मनुष्य यहा सच्चे मन से मां के दरबार में आता है, मां उसकी मनोकामना पूरी करती है। मां त्रिपुरा सुंदरी का उल्लेख दुर्गा सप्तशती में भी मिलता है। मंदिर की महत्ता को देखते हुए नगर पालिका परिषद ने तो अपने एक वार्ड का नाम ही त्रिपुरा सुंदरी रखा है।

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की वास्तुकला देखते ही बनती है। इसकी प्राचीन प्रस्तर कला अद्भुत है। इसकी स्थापत्य कला भी दर्शनीय है। मंदिर के प्रवेश द्वारों में भी विशेष नक्काशी की गई है। मंदिर के वाह्य पृष्ठ पर एक विशाल प्रस्तर पर शेर की अनुपम आकृति भी उकेरी गई है।

ऐसे मिलती है ईश्वरीय सुरक्षा!...
अल्मोड़ा काषाय पर्वत पर बसा है। जिसका उल्लेख स्कंद पुराण के मानसखंड में आता है। यह पर्वत कौशिकी (कोसी) तथा साल्मली (सुयाल) नदियों के बीच स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि यह पर्वत पर कौशिकी देवी का स्थान है और मां भगवती ने कौशिकी के रूप में प्रकट होकर शुंभ-निशुंभ दैत्यों का संहार किया था।


इसी के नाम से यहां कसारदेवी मंदिर हैं। जिसकी बड़ी मान्यता है। पहाड़ी के टापू पर बसे अल्मोड़ा शहर भूकंप की दृष्टि से जोन चार में आता है, ऐसे में यहां प्राकृतिक आपदाओं का अंदेशा कम नहीं है।

दशकों पूर्व से कुमाऊं में कई बार बड़ी प्राकृतिक आपदाएं आ चुकी हैं, जानमाल की क्षति हो चुकी है। भूकंप के बड़े झटके आ चुके हैं। सौभाग्य से अल्मोड़ा शहर सुरक्षित ही रहा है। इसका श्रेय लोग अष्ट भैरवों और नौ दुर्गाओं की कृपा दृष्टि ही मानते हैं।

यही वजह है ये मंदिर यहां की अटूट आस्था से जुड़े हैं। पूरी मान्यता है कि आसमानी आफत आए या धरातल का जलजला, अल्मोड़ा तो अष्ट भैरवों व नौ दुर्गा की कृपा दृष्टि से सुरक्षित है।

नगर व चारों ओर पहाड़ों में स्थित मंदिर...
भैरव मंदिर :- खुटकुनिया भैरव, काल भैरव, बटुक भैरव मंदिर, शंकर भैरव, बाल भैरव, शै: भैरव, वन भैरव व लाल भैरव।

दुर्गा मंदिर :- बानड़ी देवी (विंध्यवासिनी), कसारदेवी, नंदा सुनंदा, त्रिपुरासुंदरी, उल्का देवी, शीतला देवी, पातालदेवी, कालिका देवी, जाखनदेवी।