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पाकिस्तान: सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के लिए पीठ के गठन का दिया प्रस्ताव

Anil Kumar

Publish: Oct 03, 2019 22:35 PM | Updated: Oct 03, 2019 22:35 PM

Asia

  • पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए 2014 के अपने आदेश को लागू करने के लिए एक पीठ के गठन का प्रस्ताव दिया है

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार की कहानी पूरी दुनिया को पता है, लेकिन अब पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।

दरअसल, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यकों के बुनियादी अधिकारों से संबंधित 2014 के अपने आदेश को लागू करने के लिए एक पीठ के गठन का प्रस्ताव दिया है। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस पीठ के मामले को प्रधान न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा के पास भेज दिया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने यह प्रस्ताव रखा है। पीठ ने मामले की सुनवाई को फिर से शुरू करते हुए अपने पहले के आदेश को लागू करने पर संघीय व प्रांतीय सरकारों से एक महीने के अंदर जवाब मांगा है।

अपने 2014 के एक ऐतिहासिक आदेश में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश तस्द्दुक हुसैन जिलानी ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक खाका पेश किया था। इसमें अल्पसंख्यकों के मामलों को देखने के लिए एक राष्ट्रीय परिषद के गठन का भी सुझाव दिया गया था।

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PTI के सांसद रमेश कुमार ने दायर की थी याचिका

आपको बता दें कि गुरुवार की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि अल्पसंख्यक आयोग को दफ्तर के लिए जगह और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में अल्पसंख्यकों के बुनियादी अधिकारों के मामले की सुनवाई के लिए सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीके इनसाफ (PTI) के सांसद व याचिकाकर्ता रमेश कुमार अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संबंधित मंत्रालय के मंत्री काम नहीं कर रहे हैं। अल्पसंख्यक आयोग को मंत्रालय में दफ्तर भी नहीं दिया गया है।

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अदालत ने कुमार से कहा कि वह तो हुकूमत में हैं, वह चाहें तो काम करा सकते हैं। इस पर कुमार ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री अल्पसंख्यकों के लिए कोई काम नहीं कर रहे हैं। इस पर न्यायाधीश इजाजुल अहसन ने कहा कि हम यहां अपने आदेश को लागू करवाने के लिए हैं।

न्यायाधीश हसन बांदियाल ने कहा कि लगता तो यही है कि सरकार देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है। इस संबंध में अदालत ने करतारपुर साहिब कॉरीडोर का जिक्र किया। साथ ही कहा कि सभी को अपने धर्म के हिसाब से इबादत का हक हासिल है।

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