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कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस मिलने का भारत को इतंजार, पाक ने नहीं दी कोई जानकारी

Shweta Singh

Publish: Jul 20, 2019 13:57 PM | Updated: Jul 21, 2019 08:27 AM

Asia

  • Kulbhushan Jadhav Case: पाकिस्तान ने नहीं दी है कॉन्सुलर एक्सेस की आधिकारिक जानकारी
  • ICJ के फैसले के बाद गुरुवार रात को पाक विदेश मंत्रालय ने किया था ऐलान

इस्लामाबाद। पाकिस्तान अपनी आदतों से बाज आता नजर नहीं आ रहा है। कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कॉन्सुलर एक्सेस देने का ऐलान तो कर दिया, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक जानकारी भारत को नहीं दी है।

कॉन्सुलर एक्सेस की भारत को औपचारिक जानकारी नहीं

पाकिस्तान के इस रवैए से संशय की स्थिति पैदा हो रही है। बता दें कि बुधवार को ICJ ने पूर्व भारतीय नौसैनिक जाधव की फांसी पर रोक लगाते हुए, उन्हें राजनयिक पहुंच मुहैया कराने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के बाद गुरुवार देर रात पाक के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कहा कि पाक अपने देश के कानून के तहत भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।

इसके साथ ही मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि जाधव को वियना संधि के तहत राजनयिक संबंधों पर उनके अधिकारों की जानकारी से अवगत करा दिया गया है। हालांकि, पाक ने इस बारे में कोई भी औपचारिक जानकारी भारत के साथ साझा नहीं की है।

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पाक विदेश मंत्रालय ने दिया था ये बयान

आपको बता दें कि बुधवार को दि हेग स्थित ICJ के इस निर्णय को भारत की एक बड़ी जीत के तरह देखा जा रहा है। फैसले के बाद गुरुवार को पाक विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया। मंत्रालय के मुताबिक, 'ICJ के फैसले के बाद कमांडर कुलभूषण जाधव को राजनयिक संबंधों पर वियना संधि के अनुच्छेद 36 के पैराग्राफ 1(बी) के तहत उनके अधिकारों के बारे में सूचना दे दी गई है। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया था कि, 'एक जिम्मेदार देश होने के नाते पाक जाधव को देश के कानूनों के अनुसार राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा। इसके कार्य प्रणालियों पर काम किया जा रहा है।'

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2017 में सुनाई गई थी फांसी की सजा

गौरतलब है कि ICJ ने बुधवार को सुनाए गए अपने फैसले में पाकिस्तान को फांसी की सजा पर प्रभावी तरीके से दोबारा विचार करने और राजनयिक पहुंच देने का निर्देश दिया था। भारतीय नागरिक जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोपों में फांसी की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ भारत ने ICJ में अपील की थी।

क्या है कॉन्सुलर एक्सेस

युद्धबंदियों और विदेशी नागरिकों के लिए तय हुई वियना संधि के आर्टिकल 36 (1) (बी) में कहा गया है कि अगर किसी देश के नागरिक को किसी दूसरे देश में गिरफ्तार किया जाता है, तो गिरफ्तार करने वाले देश को कुछ अनिवार्य शर्तें माननी होंगी।

इसके प्रावधान इस तरह हैं-

  • गिरफ्तार करने वाले देश को बिना देरी किए आरोपी व्यक्ति के देश को जानकारी देनी होगी।
  • गिरफ्तार करने वाले देश को आरोपी व्यक्ति के देश के दूतावास या उच्चायोग को ये जानकारी देना जरूरी है कि उन्होंने उस देश के नागरिक को गिरफ्तार किया है।
  • संधि के आर्टिकल 36(1)(सी) में कहा गया है कि आरोपी व्यक्ति के देश के अधिकारियों को गिरफ्तार करने वाले देश में सफर करने का अधिकार होगा। यही नहीं, उन्हें अपने नागरिक से अकेले में मिलने और उसके लिए किसी भी तरह की कानूनी मदद मुहिया कराने का भी प्रावधान है।

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