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हरियाणा के तीन मंत्री बना भाजपा ने खेला दलित व पिछड़ा कार्ड, मोदी ने नए की बजाय इन पुराने साथियों पर जताया भरोसा

Prateek Saini

Publish: May 30, 2019 19:41 PM | Updated: May 30, 2019 19:41 PM

Ambala

तीन सांसदों को शामिल किए जाने से यह बात भी साफ हो गई है कि मोदी ने किसी नए चेहरे की बजाए पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया है...

(चंडीगढ़,अंबाला): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी की कैबिनेट में शामिल हुए तीन मंत्री जातिगत व राजनीतिक समीकरणों का परिणाम है। तीन मंत्रियों को केंद्र में प्रतिनिधित्व देकर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक दांव खेल दिया है। मोदी सरकार में पहली बार उत्तरी हरियाणा को प्रतिनिधित्व दिया गया है। केंद्र में शामिल हुए तीन मंत्रियों में एक दलित तथा दो पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं। मायने साफ हैं कि भाजपा ने दलित और पिछड़ा वर्ग को लुभाने के लिए पासा फैंक दिया है। तीन सांसदों को शामिल किए जाने से यह बात भी साफ हो गई है कि मोदी ने किसी नए चेहरे की बजाए पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया है।


हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भले ही दस सीटों पर चुनाव जीत गई है लेकिन प्रदेश में कई लोकसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बूथ स्तर पर भाजपा को बहुत कम वोट मिले हैं। दलितों के वोट कांग्रेस तथा लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के खाते में भी ट्रांसफर हुए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान यह वोट बैंक भाजपा की तरफ ही रहे, जिसके चलते रतन लाल कटारिया को मोदी मंत्रीमंडल में स्थान दिया गया है। कटारिया लगातार दूसरी बार सांसद बने हैं। उन्होंने अंबाला से कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री कुमारी सैलजा को हराया है। कटारिया के माध्यम से उत्तरी हरियाणा को केंद्र में प्रतिनिधित्व मिल गया है। यही भाजपा का गढ़ है।


मोदी सरकार में शामिल हुए दूसरे मंत्री राव इंद्रजीत पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं और दक्षिण हरियाणा की राजनीति में कद्दावर नेता माने जाते हैं। राव इंद्रजीत लगातार चौथी बार और अब तक पांच बार सांसद बन चुके हैं। राव इंद्रजीत को मंत्री बनाकर दक्षिण हरियाणा को प्रतिनिधित्व दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि राव इंद्रजीत पिछली मोदी सरकार में भी मंत्री थे और उससे पहले मनमोहन सरकार में भी मंत्री थे।


तमाम अवरोधों के बावजूद केंद्रीय मंत्रीमंडल में स्थान बनाने में कामयाब रहे फरीदाबाद के सांसद कृष्णपाल गुर्जर भी पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं। गुर्जर पहले भी मंत्री रह चुके हैं और मोदी व शाह के दरबार में इनकी पकड़ मजबूत हैं। हरियाणा के कई सांसद कृष्णपाल गुर्जर का रास्ता रोकने में लगे हुए थे लेकिन जातिवाद, क्षेत्रवाद तथा निजी संबंधों के बल पर वह फिर से केंद्र में मंत्री बनने में कामयाब हो गए हैं।

 

काम नहीं आई बीरेंद्र सिंह की बेटे के लिए लॉबिंग

अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने के लिए अपना करियर दांव पर लगाने वाले चौधरी बीरेंद्र सिंह की लॉबिंग काम नहीं आई और नौकरशाह से नेता बना उनका बेटा मोदी मंत्रीमंडल में जगह नहीं पा सका। चौधरी बीरेंद्र सिंह मोदी-वन में केंद्रीय मंत्री थे।

 

हुड्डा परिवार को पटखनी देने वाले ब्राह्मणों की झोली खाली

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान सर्वाधिक सुर्खियों में हरियाणा की सोनीपत व रोहतक लोकसभा सीट रही। सोनीपत से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का मुकाबला भाजपा के पूर्व सांसद रमेश कौशिक तथा रोहतक में दीपेंद्र सिंह हुड्डा का मुकाबला भाजपा के अरविंद शर्मा के साथ था। विपरीत परिस्थितियों में भी कौशिक ने हुड्डा को हराकर सोनीपत को फतेह किया था। दूसरी तरफ कांग्रेस से बसपा और बसपा से भाजपा में आने वाले अरविंद शर्मा की मर्जी के खिलाफ भाजपा ने उन्हें रोहतक से टिकट दिया था। अरविंद शर्मा ने बेहद कठिन मुकाबले में कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा को साढे सात हजार वोटों से पराजित किया था। भाजपा के खाते में दसवीं सीट रोहतक की ही थी, जिसे अरविंद शर्मा ने भाजपा की झोली में डाला था। भाजपा ने पहली बार दो ब्राह्मणों को चुनाव मैदान में उतारा था। दोनों नेता अपने-अपने तरीके से इस बात के लिए प्रयास कर रहे थे कि हुड्डा के गढ़ में सेंध लगाने के बदले उन्हें भी सरकार में प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके बावजूद दोनों नेताओं को पीएमओ से कोई फोन नहीं आया।