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चुनावी महाभारत में कुरुक्षेत्र का रण जीतना अर्जुन के लिए कड़ी चुनौती,जनता पार लगाएगी या डूबेगा इनेलो का जहाज?

Prateek Saini

Publish: Apr 23, 2019 17:13 PM | Updated: Apr 23, 2019 17:13 PM

Ambala

मनोहर लाल, हुड्डा और अभय चौटाला की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है कुरुक्षेत्र संसदीय सीट का चुनाव...

 

(अंबाला,कुरूक्षेत्र): महाभारत की धरती कुरुक्षेत्र एक बार फिर चुनावी रण के लिए तैयार है। पूर्व सांसद नवीन जिंदल के इस चुनावी रण से खुद को अलग कर लिए जाने के बाद सभी की निगाह इस धर्मक्षेत्र पर टिक गई है। महाभारत के इस रण में एक छोर पर भाजपा के नायब सिंह सैनी हैं तो दूसरे छोर पर इनेलो के अर्जुन चौटाला। कांग्रेस के निर्मल सिंह ने इस रण में चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है। सभी दलों के अपने-अपने मुद्दे हैं तो कुछ सिर्फ लहर और सत्ता के आसरे हैं।

 

करीब १५ साल के लंबे अंतराल के बाद इनेलो विधायक दल के नेता अभय सिंह चौटाला ने अपने बेटे अर्जुन चौटाला को कुरुक्षेत्र के चुनावी रण में उतारा है। अर्जुन चौटाला हरियाणा में चुनाव लड़ रहे सबसे कम उम्र के प्रत्याशी हैं। इनेलो में हुए दोफाड़ के बाद जननायक जनता पार्टी अस्तित्व में आई। दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला जजपा की राजनीति कर रहे तो अभय चौटाला ने अपने बेटे अर्जुन चौटाला व करण चौटाला को यूथ और छात्र विंग की जिम्मेदारी सौंपी। कुरुक्षेत्र के रण में पहली बार ताल ठोंक रहे अर्जुन चौटाला इनेलो की यूथ और छात्र विंग के प्रभारी हैं।


कुरुक्षेत्र के चुनावी रण में भाजपा प्रत्याशी नायब सिंह सैनी के रूप में जहां सीधे मुख्यमंत्री मनोहर लाल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, वहीं अर्जुन चौटाला को चुनावी रण में जिताने के लिए इनेलो विधायक दल के नेता अभय सिंह चौटाला, इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा और पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा पर भी बड़ी जिम्मेदारी है। पूर्व सांसद नवीन जिंदल के चुनाव नहीं लड़ने के कारण यहां पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पसंद को टिकट दिया गया है।


कुरुक्षेत्र का रण दरअसल भले ही अर्जुन चौटाला, नायब सिंह सैनी और निर्मल सिंह लड़ रहे, लेकिन यहां मुख्य टक्कर अभय चौटाला, भूपेंद्र हुड्डा और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच है। इन तीनों दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। अभय सिंह चौटाला ने करीब १५ साल पहले २००४ में यहां से खुद लोकसभा का चुनाव लड़ा था। अब उन्होंने अपने बेटे की लांचिंग कर विरोधियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। बाक्सिंग के खेल में माहिर अर्जुन चौटाला को खेती पसंद है। इनेलो ने अर्जुन पर दांव खेलकर अपने राजनीतिक विरोधियों को चुनौती देने के साथ ही अपने भतीजों दुष्यंत व दिग्विजय के खिलाफ राजनीतिक तौर पर खड़ा कर दिया है।


अर्जुन चौटाला का विवरण

- ताऊ देवीलाल की राजनीतिक विरासत का आगे बढ़ाने के लिए कूदे मैदान में

- चौटाला गांव के लोगों से सीधे जुड़े और खेती करने के शौकीन

- अर्जुन भारत के सबसे कम उम्र के उम्मीदवारों में शामिल

- पिता अभय चौटाला के साथ एसवाईएल नहर निर्माण के आंदोलन में सक्रिय भूमिका

- पंजाब की सीमा में प्रवेश करते हुए अभय चौटाल व ७१ अन्य लोगों के साथ चार दिन तक गिरफ्तार रहे

- इनेलो से दुष्यंत व दिग्विजय के निलंबन के बाद राजनीतिक करियर की शुरुआत

- इनेलो की युवा और छात्र विंग को सक्रिय करते हुए युवाओं को संगठन से जोड़ा।