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हर दिन 10 हजार को मौत का डर

Dharmendra Yadav

Publish: Jul 19, 2019 19:35 PM | Updated: Jul 19, 2019 19:35 PM

Alwar

alwar road excident हजारों उद्यमियों, कर्मचारी, श्रमिक व मजदूरों को रामगढ़ रोड से जाना पड़ता है मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र

अलवर.

alwar road excident अलवर शहर से रामगढ़ रोड होते हुए रोजाना मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (एमआईए) जाने वाले करीब 10 उद्यमियों, कर्मचारी, श्रमिक व मजदूरों को मौत का डर लगने लगा है। इस रोड पर आए दिन सडक़ दुर्घटनाएं होने लगी हैं। यही नहीं दुर्घटनाएं भी इतनी भयानक होती हैं कि घायलों से अधिक मौत हो रही है। बहुत से ऐसे मामले भी हैं जिनमें कोई घायल नहीं हुआ। ऑन द स्पॉट ही अधिकतर की मौत हो गई। इन दुर्घटनाओं के बाद रामगढ़ से निकलने वाले हजारों लोगों के अलावा उनके परिवारजनों को भी हर समय डर रहता है। कोई भी alwar road excident दुर्घटना होने पर आपस में एक-दूसरे की खैर-खबर लेनी पड़ती है। एमआईए जाने वालों सहित अन्य लोग शामिल करें तो इस रोड से 24 घण्टे में 50 हजार से अधिक लोग निकलते हैं।

बाइक पर पांच, सबकी मौत

पिछले करीब 15 दिनों में करीब पांच किलोमीटर की सडक़ पर छह जनों की मौत हो गई। बख्तल की चौकी के निकट एक ही बाइक पर सवार पांच जने डम्पर से टकरा गए। मौके पर ही पांचों की मौत हो गई। इसी तरह हाल में पार्षद कपिलराज की दिवाकरी मोड़ के पास चेचिस की टक्कर से मौत हो गई। इनके बाद दो गंभीर घायल हो चुके हैं। इस रोड पर दुर्घटनाओं में आए दिन मौत होने का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि साल 2014 से 2018 तक 205 जनों की मौत हुई है। ये आंकड़े एनईबी, एमआईए, रामगढ थाने के अनुसार हैं। वैसे2018 के बाद भी करीब दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

600 से अधिक फैक्ट्रियां चालू

एमआईए में करीब 600 से अधिक फैक्ट्रियां चालू हैं। जिनमें करीब आठ से दस हजार कर्मचारी, मजदूर, श्रमिक व उद्यमी ऐसे हैं जिनका रोजाना अलवर से एमआईए आना-जाना होता है। जब भी इस रोड पर कोई बड़ी दुर्घटना होती है तो एक बार तो सबकी रूह कांप जाती है। एमआईए के अलावा छोटे-बड़े वाहन निकलते हैं। जिनमें हजारों लोग आते-जाते हैं।

उद्यमी कह रहे रोजाना दुर्घटना देख रहे

एमआईए संघ के अध्यक्ष मोहन निहालानी का कहना है कि रोजाना दुर्घटनाएं आंखों के सामने हो रही हैं। अधिकतर बड़े वाहनों से दुपहिया वाहन ज्यादा चपेट में आते हैं। कई बार बड़े वाहन भी आपस में भिड़ जाते हैं। बहुत बार ऐसा होता है कि कार्यालय जाते समय ही सडक़ पर घायल तड़पते मिल जाते हैं। यह देखकर मन खराब हो जाता है। हाल में भी जिला कलक्टर को अवगत कराकर रोड का कार्य शुरू कराने की मांग की है। डिवाइडरयुक्त रोड बनने पर ही दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है।

-------एक नजर 2014 से 2018 की मौत के आंकड़ों पर -------

थानावार मौत के आंकड़े

थाना एनईबीसाल मौत

2014 8

2015 9

2016 7

2017 6

2018 7

थाना एमआईए साल मौत

2014 18

2015 20

2016 21

2017 25

2018 18

थाना रामगढ़ साल मौत

2014 12

2015 10

2016 14

2017 09

2018 13

नोट : ये 2018 तक के आंकड़े हैं। 2019 में भी काफी लोगों की मौत हो चुकी है।