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निकाय चुनाव : नरेगा श्रमिक से भी कम पार्षद की सैलेरी, फिर भी 900 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतरे

Lubhavan Joshi

Publish: Nov 07, 2019 15:36 PM | Updated: Nov 07, 2019 15:36 PM

Alwar

Nikay Election In Rajasthan : पार्षदों का मानदेय नरेगा श्रमिकों से भी कम है, फिर भी नेताओं को शहर की सरकार में जुडऩे के लिए खासा उत्साह है।

अलवर. पार्षद का मानदेय मनरेगा श्रमिक से भी कम है, फिर भी अलवर नगर परिषद सहित जिले की तीनों निकायों में उम्मीदवारों की लंबी कतार है। अकेले अलवर में ही 447 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए हैं।अलवर नगर परिषद के एक वार्ड में औसतन 7 प्रत्याशी अलवर नगर परिषद में 65 वार्ड हैं। इसमें भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दल व निर्दलीय 447 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए हैं। यानि एक वार्ड में औसतन सात प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए हैं। निकाय चुनाव में कांग्रेस व भाजपा ने 129 प्रत्याशी ही उतारे, लेकिन निर्दलीय व अन्य दलों के उम्मीदवारों की संख्या 300 के पार रही।

पार्षदों की शक्तियों को लेकर रहती है शिकायत

नगर परिषद की बैठकों में ज्यादातर पार्षदों की शिकायत रहती है कि शक्तियों के अभाव में वे ज्यादा कुछ नहीं करा सकते हैं। उनका पांच साल का कार्यकाल सिर्फ साधारण सभा की बैठकों में शोरगुल करने में ही गुजर जाता है। छिटपुट काम कराने के लिए भी आयुक्त और सभापति के पास जाकर गुजारिश करनी पड़ती है। इसको लेकर पूर्व में कई बार नगरीय निकायों के पार्षदों को अधिकार दिए का मुद्दा उठ भी चुका है। वार्ड में घूमने में खर्च हो जाते हैं मानदेय और भत्ते
अधिकांश पार्षद कहते हैं कि जो मानदेय या भत्ता, स्वायत्त शासन विभाग की दिया जाता है। वह तो वार्ड की जनता के काम कराने व सफाई व्यवस्था के अलावा अन्य कार्यों में ही खर्च हो जाता है। ऐसे में पार्षद के लिए इतनी जंग का कारण सभापति व उप सभापति बनाने में उनकी मुख्य भूमिका मानी जा सकती है। वैसे पार्षद की तुलना विधायकों के कार्यों से की जाती है लेकिन उनके पास न तो विधायकों जैसा कानूनी अधिकार है न कोई बजट। आयुक्त, सभापति से लेकर बाबू तक के वित्तीय अधिकार हैं लेकिन पार्षद को पांच साल में 50 हजार रुपए के विकास कार्य कराने की आजादी भी नहीं है।
प्रति माह 2500 व प्रति बैठक 500 रुपए भत्ता

पार्षदों को पूर्व में 2175 रुपए प्रतिमाह मिलते थे लेकिन राज्य सरकार ने मानदेय बढ़ाकर 2500 रुपए प्रतिमाह कर दिया। जबकि 500 रुपए प्रति बैठक के हिसाब से भत्ता देय होता है।

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