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कॉलेज में व्याख्याताओं की कमी विद्यार्थियों की पढ़ाई हो रही चौपट

Pradeep kumar yadav

Publish: Oct 21, 2019 01:24 AM | Updated: Oct 21, 2019 01:24 AM

Alwar

विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में

अलवर. बानसूर कस्बे के सरकारी विद्यालय में संचालित राजकीय महाविद्यालय में व्याख्याताओं के पद रिक्त होने से विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में है। ऐसे में प्रवेश ले चुके छात्र छात्राएं अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। विद्यालय में विषय व्याख्याता नहीं होने से छात्र-छात्राओं की पढाई चौपट हो रही है। इस बारे में महाविद्यालय प्रशासन ने कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों सहित स्थानीय विधायक को भी अवगत कराया लेकिन समस्या जस की तस है। कस्बा स्थित राजकीय महाविद्यालय गत वर्ष अस्तित्व में आया। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे के बानसूर आगमन पर पूर्व मंत्री डॉ.रोहिताश्व की मांग पर राजकीय महाविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। और सरकार की ओर से महाविद्यालय शीघ्र ही शुरु भी कर दिया गया। गत वर्ष महाविद्यालय में कला प्रथम वर्ग की २०० सीटें आंवटित की गई और सभी सींटे पूरी कर दी गई थी। राज्य सरकार की ओर से पांच व्याख्याता भी लगाएं गए थे। लेकिन इस साल के दूसरे सेंशन में कला द्वितीय वर्ष कक्षाएं भी शुरू हो गई। द्वितीय वर्ष की भी २०० सीेंटे आंवटित की गई। महाविद्यालय में वर्तमान समय २७४ छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। महाविद्यालय में विषय व्याख्याता नहीं होने स छात्र-छात्राओं का महाविद्यालय से मोहभंग होता नजर आ रहा है। गौरतलब है क्षेत्र में बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी महाविद्यालयों में पढ़ रहें है।
चार विषयों की ही हो रही है।
पढाई
राजकीय महाविद्यालय में भूगोल, इकोनोमिक्स एवं हिंदी विषय के व्याख्याता नहीं है। वर्तमान में मात्र भूगोल, इतिहास, अंग्रेजी एवं संस्कृत की विषयों की पढ़ाई हो पा रही है। ऐसे में छात्र -छात्राएं इकोनोमिक्स, राजनीति विज्ञान एवं हिंदी के पढ़ाई स्वयं अपने घर पर ही कर रही हैं।
२७४ विद्यार्थी पर मात्र तीन व्याख्याता
महाविद्यालय में प्राचार्य, विषय व्याख्याता, एएओ, एलडीसी, यूडीसी, लैब बॉय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित कुल १८ पद स्वीकृत है। लेकिन वर्तमान समय में महाविद्यालय में इतिहास, भूगोल एवं अंग्रेजी विषय के व्याख्याता के पद ही भरे हुए हैं। जबकि संस्कृत के व्याख्याताडेपूटेशन पर लगे हुए हैं। व्याख्याता राजीव कक्कड़ अंग्रेजी विषय की पढ़ाई के साथ प्राचार्य का भी काम भी देख रहे हैं।