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कुक कम हेल्पर को मिल रहा 44 रुपए मानदेय, कैसे हो गुजारा

Kailash Chand Sharma

Publish: Oct 21, 2019 10:00 AM | Updated: Oct 21, 2019 01:08 AM

Alwar

कुक कम हेल्पर को मिल रहा 44 रुपए मानदेय, कैसे हो गुजारा


सोडावास . कस्बे सहित प्रदेश में आठवीं तक के सरकारी विद्यालयों में रसोई की गर्मी में तप कर बच्चों के लिए दूध गर्म करने से लेकर दोपहर का भोजन तैयार करने वाली कुक कम हेल्पर का आर्थिक शोषण हो रहा है ।
ग्राम ढिस निवासी महाराजा सूरजमल फाउंडेशन राजस्थान प्रदेश सचिव सुंदरलाल चौधरी ने बताया की कुक कम हेल्पर को जो मानदेय दिया जा रहा है, वह एक अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी का चौथा हिस्सा भी नहीं है । राजस्थान सरकार ने गत मार्च माह में ही प्रदेश में अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 225 रुपए प्रतिदिन यानी 6750 रुपए प्रतिमाह की थी । जबकि कुक कम हेल्पर का मानदेय मात्र 1320 महीना है, यानी 1 दिन के मात्र 44 रुपये, खास बात यह है कि विधायकों, मंत्रियों एवं मुख्यमंत्री का वेतन जब चाहे बड़ा लिया जाता है, लेकिन गर्मी में भट्टी के पास तपने वाली कुक कम हेल्पर का मानदेय बढ़ाने की बजाए आंकड़ों में खेल खेला जा रहा है । पिछले काफी समय से कुक कम हेल्पर का मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही है, जिसको लेकर गत वर्ष वित्तीय वर्ष में सरकार ने हजार रुपए से बढ़ाकर 1320 का मानदेय किया, लेकिन 1320 रुपए महीने मानदेय को कम हेल्पर के लिए घर चलाना मुश्किल है । पहले सिर्फ खाना बनाना अब दूध गर्म करने की की जिम्मेदारी भी अलग से दी गई है। वहीं नरेगा में श्रमिकों को 200 से 250 प्रतिदिन मजदूरी मिलती है ऐसे में पोषाहार पकाने के लिए इतने कम मानदेय में कुक कम हेल्पर का इंतजाम परेशानी भरा है ।
नहीं कर पा रहे हैं
दूसरा कार्य
स्कूल में पोषाहार को पकाने वाले को कम हेल्पर सुबह से लगातार खाना पकाने कार्य करते इसके बाद बच्चों को खाना खिला कर घर जाते हैं । ऐसे में कुक कम हेल्पर मजदूरी नरेगा सहित अन्य कार्य नहीं कर पाते हैं । ऐसे में ज्यादातर को कम हेल्पर पोषाहार पकाने कार्य किया तेरी दूसरी मजदूर नहीं कर पा रहे हैं । वह इतना कम मानदेय उन्हें के बावजूद भी यह राशि भी समय पर नहीं मिल पाती है । राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बधीन की कुक कम हेल्पर बाला देवी ने बताया कि सुबह 10 बजे स्कूल आती है और दोपहर 2 बजे वापस घर जाती है । इसके बावजूद मात्र 1320 मानदेय दिया जा रहा है । इस कई बार तो समय पर मानदेय नहीं मिलता ।

सुरक्षा उपकरणों के बिना जान जोखिम में डाल रहे कर्मचारी

बहरोड़. विद्युत निगम इन दिनों कस्बे में दीपावली के त्योहार को देखते हुए प्रत्येक दिन बड़े स्तर पर विद्युत लाइनों को ठीक करने का कार्य किया जा रहा है। विद्युत लाइनों पर कार्य करने वाले कर्मचारी निगम के नियमों की अनदेखी कर बगैर सुरक्षा उपकरणों के विद्युत लाइनों व खम्बों पर चढक़र लाइनों को सही करने का कार्य कर रहे है।
रविवार को कस्बे के अस्पताल रोड़ पर निगम के लाइनमैन व अन्य कर्मचारी विद्युत लाइनों के रखरखाव व फॉल्ट को सही करने का कार्य कर रहे थे जोकि बिना किसी उपकरण के विद्युत लाइनों व खम्बों पर चढक़र बेखौफ होकर कार्य करने में लगे थे। निगम के कर्मचारी शटडाउन लेकर कार्य करने के दौरान हाथ पांव में किसी तरह के सुरक्षा उपकरण नहीं पहने हुए थे। विद्युत लाइनों व खम्बों पर कार्य कर रहे कर्मचारियों की नजर जब कैमरे पर गई तो वह उपर देखने लगे।विद्युत निगम के कर्मचारियों ने शटडाउन लेकर बिजली लाइनों पर कार्य करने के दौरान सब स्टेशन से कर्मचारियों ने बिजली छोडऩे के दौरान कई कर्मचारी हादसे का शिकार हो चुके है। विद्युत लाइन पर कार्य करने के दौरान पिछले दिनों बहरोड़ शहर,बर्डोद सब स्टेशन के
जेईएन व डवाणी के विद्युत केन्द्र पर भी हादसे का शिकार हो चुके है।
करेंगे पाबंद
विद्युत निगम के कर्मचारियों ने सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करने को लेकर सहायक अभियंता प्रशांत कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों के पास सुरक्षा उपकरण जैसे दस्ताने,जूते व टोपी पहनने के लिए है वहीं अगर कुछ उपकरण कम रहते है तो ओर व्यवस्था की जाएगी। बगैर सुरक्षा उपकरण के कार्य करने वाले कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से पाबन्द किया जाएगा।
सुरक्षा में भारी लापरवाही
निगम के कर्मचारियों ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण पहने विद्युत लाइनों व खम्बों पर रखरखाव का कार्य करने के दौरान अचानक से किसी भी कर्मचारी लापरवाही से लाइन में विद्युत सप्लाई शुरू कर दी जाए तो वह उपर चढ़ कर कार्य कर रहे कर्मचारियों की जान पर आफत बन सकती है। अगर किसी लाइन से तार छूने जाए तो भी करंट आ सकता है। जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।