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आस्था के रास्ते का रोडा बनी जर्जर सडक़

Shyam Sunder Sharma

Publish: Aug 22, 2019 17:28 PM | Updated: Aug 22, 2019 17:28 PM

Alwar

भर्तृहरिधाम पर मेला ४ सितम्बर को, प्रशासन ने अब तक नहीं ली टूटी सडक़ों की सुध

अलवर ग्रामीण. देश दुनिया में तपोभूमि के नाम से विख्यात भर्तृहरिधाम पर वैसे तो साल भर आस्था का ज्वार दिखाई पड़ता है, लेकिन यहां भरने वाले मेले में अलवर जिला ही नहीं, प्रदेश व देश के अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं क पहुंचने से अलग ही छटा दिखाई पड़ती है। इस बार भर्तृहरिधाम में ४ सितम्बर को मेले की शुरुआत होगी।

योगीराज तपस्वी भर्तृहरि का लक्खी मेला शुरु होने में कम ही दिन बचे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से यहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए इंतजाम नगण्य ही दिखाई देते हैं। मेले में राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, यूपी, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर सहित अन्य प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भर्तृहरिधाम पर दर्शन करने के लिए आते हैं। मेला समीप होने के बावजूद भर्तृहरिधाम मार्ग पर गहरे गड्ढों की मरम्मत की सुध नहीं ली गई है। भर्तृहरिधाम के मुख्य द्वार से मठ तक सडक़ क्षतिग्रस्त व जर्जर हालत में है, जहां कंक्रीट निकलने दुर्घटना की आशंका है। वहीं नंगे पैर दंडोती देने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
गंदगी व कीचड़ से परेशानी: भर्तृहरिधाम स्थित समाधि स्थल के दोनों और गंदगी कीचड़ व कूड़े के ढेर लगे हैं, यहां अभी सफाई की सुध नहीं ली गई है।

गौरतलब है कि श्यामगंगा से मालाखेड़ा बिजवाड़ नरुका तक सडक़ में गहरे गडढ़े हैं, वही नटनी का बारा से लेकर माधोगढ़, कुशलगढ़ मुख्य सडक़ मार्ग गड्ढो में तब्दील हो चुका है। सार्वजनिक निर्माण विभाग, पंचायत राज विभाग की ओर से अभी तक सडक़ के गहरे गड्ढों की मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया है। इसके अलावा भर्तृहरिधाम पर लगाई गई सौर ऊर्जा लाइट भी खराब हो चुकी है। धार्मिक स्थल पर स्थाई तौर पर सुलभ कॉम्प्लेक्स की व्यवस्था नहीं है।
ग्राम पंचायत देती है मेले के टेण्डर: ग्राम पंचायत माधोगढ़ की ओर से हर वर्ष मेले में व्यवस्था के लिए टेंडर छोड़े जाते हैं। वहीं ग्राम पंचायत की ओर से रोशनी व्यवस्था के नाम पर ठेका दिया जाता है।


मेला मजिस्ट्रेट की होती है नियुक्ति : जिला मजिस्ट्रेट की ओर से मेले में मजिस्ट्रेट व सहायक मजिस्ट्रेट लगाया जाता है। मेले से पहले प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को लेकर बैठकें की जाती हैं, लेकिन मेला शुरू होने
तक भी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो पाती। मेले में प्याऊ व भंडारे लगाए जाते हैं।