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बिन अधिकारी पांच करोड़ राशि का हस्तातंरण अटका, सरपंचों को सताई भुगतान की चिंता

Prem Pathak

Publish: Dec 11, 2019 23:21 PM | Updated: Dec 11, 2019 23:21 PM

Alwar

प्रदेश में पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगने की तैयारी है, वहीं अलवर जिले में विभिन्न योजनाओं की करीब पांच करोड़ की राशि का हस्तांतरण अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हो पाने से अटक गया है।

अलवर. प्रदेश में पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगने की तैयारी है, वहीं अलवर जिले में विभिन्न योजनाओं की करीब पांच करोड़ की राशि का हस्तांतरण अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हो पाने से अटक गया है। राशि हस्तांतरण नहीं हो पाने की सबसे ज्यादा चिंता ग्राम पंचायतों के सरपंचों को सता रही है।

ग्राम पंचायतों में सरपंचों का कार्यकाल कुछ ही दिन का बचा है, इस कारण ज्यादातर सरपंच पूर्व में कराए गए विकास कार्यों की राशि का रेकॉर्ड में समायोजन कराने, नए स्वीकृत विकास कार्यों की राशि का हस्तांतरण ग्राम पंचायत के नाम कराने की जल्दी में है। कारण है कि कुछ ही दिन बाद पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार सहिंता लगना तय है। आचार संहिता में पंचायती राज विभाग में विभिन्न योजनाओं की राशि का हस्तांतरण, पूर्व में जारी राशि का समायोजन, नए विकास कार्य स्वीकृत नहीं हो पाने एवं विकास कार्यों के उद्घाटन आदि पर प्रतिबंध रहेगा।

विभिन्न योजनाओं की मंजूरी व समायोजन रुका

जिला परिषद में विधायक निधि, सांसद कोटे के विकास कार्यों की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृतियां व समायोजन रुक गया है। वहीं मेवात योजना का कार्य भी थमा। विधायक निधि में एक करोड़ 75 लाख रुपए की स्वीकृतियां अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर के अभाव में रुकी है। वहीं सांसद कोटे में 2 करोड़ रुपए लागत के 70 कार्यों की वित्तीय स्वीकृति भी अधिकारी के हस्ताक्षर के अभाव में अटकी है। साथ ही सांसद कोटे में 2.50 करोड़ राशि लागत के 74 कार्यों के चेक भी हस्ताक्षर के बिना अटके हैं। यानि इन सभी योजनाओं में करीब 5 करोड़ की राशि कार्यकारी संस्थाओं को हस्तांतरित होने के बिल अधिकारियों के हस्ताक्षर के लिए लंबित हैं।

न सीइओ और न ही लेखाधिकारी

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गत 30 नवम्बर से उपार्जित अवकाश पर हैं। वहीं जिला परिषद की कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास महिला बाल विकास विभाग के उपनिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार है। जिला परिषद के लेखाधिकारी का पद गत 30 नवम्बर से रिक्त है। यही कारण है कि विभिन्न योजनाओं के बिलों, स्वीकृतियों पर अभी हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं।

डीआरडीए कर्मियों का वेतन अटका

बिलों पर अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर के अभाव में डीआरडीए कर्मचारियों का वेतन भी अब तक नहीं मिल पाया है। डीआरडीए कर्मचारी हर दिन नवम्बर के वेतन का इंतजार कर रहे हैं। डीआरडीए कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष पंकज शर्मा का कहना है कि दिसम्बर माह की 11 तारीख होने तक डीआरडीए कर्मचारियों को अभी वेतन नहीं मिल पाया है।

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