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राजस्थान के इस जिले में शान से आने के बाद कुर्सी गंवाकर लौटे कई पुलिस अधीक्षक, क्राइम इतना कि सीधे घटना स्थल पर पहुंचे

Sujeet Kumar

Publish: Aug 20, 2019 11:08 AM | Updated: Aug 20, 2019 11:08 AM

Alwar

अलवर जिले में क्राइम इतना अधिक है कि यहां आने वाले पुलिस अधीक्षक को सीधे घटनास्थल पर पहुंचना पड़ता है।

अलवर. अलवर को यूं ही क्रिटिकल नहीं कहा जाता क्योंकि जिले के कई पुलिस अधीक्षकों को ड्यूटी ज्वॉइन करने के साथ ही कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए सीधे फील्ड में उतरना पड़ा। इसके अलावा जिले के कई एसपी को बहुत थोड़े कार्यकाल के बाद कुर्सी गंवाकर पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा करनी पड़ी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कई आईपीएस के लिए अलवर की कानून-व्यवस्था वाटर लू का मैदान साबित हुई है।

कुर्सी नहीं सीधे फील्ड संभाला

बहुचर्चित थानागाजी गैंगरेप की घटना के कुछ दिन बाद ही आईपीएस परिस देशमुख को मई माह में अलवर जिला पुलिस अधीक्षक की कमान सौंपी गई। घटना को लेकर देशभर में बवाल होने के कारण परिस देशमुख को दफ्तर में कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही सीधे थानागाजी जाना पड़ा। ऐसा ही वर्ष-2013 में आईपीएस संतोष चालके के साथ हुआ जिनके ज्वॉइन करने से पहले ही पालपुर गैंग तिजारा कोर्ट परिसर के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग कर गिरोह के सरगना समेत चार बदमाशों को छुड़ा ले गई थी। चालके को ज्वॉइन करने से पहले सीधे घटनास्थल तिजारा पहुंचना पड़ा था।

इनको हटाया गया

हाल ही हुए थानागाजी गैंगरेप मामले में एफआईआर दर्ज होने में देरी के कारण सरकार ने तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक राजीव पचार को एपीओ कर अलवर एसपी के पद से हटाया। इससे पहले वर्ष-2013 में ज्वाइनिंग के 5-6 दिन बाद ही एसपी संतोष चालके को अलवर से हटा दिया गया। वर्ष-1994 में मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत की यात्रा के दौरान शहर में अम्बेडकर चौराहे पर लगी डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने पर सरकार ने तत्कालीन अलवर पुलिस अधीक्षक मनफूल सिंह पूनिया को ज्वाइनिंग के 13 दिन बाद ही अलवर से हटा दिया था। 90 के दशक में खेरली में दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढऩे देने के मामले ने भी जबरदस्त तूल पकड़ा। जिसमें तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक मनोज भट्ट और जिला कलक्टर सुनील अरोड़ा को कुर्सी गवानी पड़ी।

आते ही घटनास्थल पर पड़ा दौडना

रामगढ़ के ललावंडी में 20 जुलाई 2018 को रकबर मॉब लिंचिंग प्रकरण हुआ। घटना के अगले दिन 21 जुलाई को आईपीएस राजेन्द्र सिंह ने अलवर एसपी का कार्यभार संभाला और 22 जुलाई को तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और डीजीपी ओपी गल्होत्रा के साथ एसपी राजेन्द्र सिंह घटनास्थल ललावंडी पहुंचे। वर्ष-2007 में अलवर एसपी रहे एमएन दिनेश को भी ज्वॉइन करने के अगले ही दिन दंगा भडकऩे पर नारायणपुर जाना पड़ा। इससे पहले वर्ष-1994 में अलवर एसपी रहे सुधीर प्रताप सिंह के कार्यभार संभालते ही बहादुरपुर में बड़ी डकैती के बाद उन्हें रात को ही घटनास्थल पर जाना पड़ा।

ज्वॉइनिंग से पहले ही वापस बुला लिया

वहीं, आईपीएस एमएल लाठर को भी धौलपुर से अलवर एसपी लगाया गया था। वह अलवर ज्वॉइन करने आ रही रहे थे कि इससे पहले ही सरकार ने उन्हें जयपुर बुला लिया था।