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अलवर जिले का भाजपा संगठन विभाजित, दो होंगे जिलाध्यक्ष दक्षिण व उत्तर जिले में बांटा

Prem Pathak

Publish: Dec 07, 2019 13:02 PM | Updated: Dec 07, 2019 13:02 PM

Alwar

संगठनात्मक दृष्टि से कार्य को सुचारू करने के लिए भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने अलवर जिले को संगठन की दृष्टि से दो जिलों में बांटने का निर्णय किया है। इनमें अलवर दक्षिण जिले में 6 व अलवर उत्तर जिले में 5 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

अलवर. संगठनात्मक दृष्टि से कार्य को सुचारू करने के लिए भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने अलवर जिले को संगठन की दृष्टि से दो जिलों में बांटने का निर्णय किया है। इनमें अलवर दक्षिण जिले में 6 व अलवर उत्तर जिले में 5 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। हालांकि भाजपा में संगठन जिलाध्यक्ष के चुनाव या मनोनयन तक अभी पूरे जिले के संगठन की कमान मौजूदा जिलाध्यक्ष के हाथ ही रहेगी। प्रदेश में भाजपा संगठनात्मक दृष्टि से अब 44 जिले होंगे।

अलवर अब उत्तर और दक्षिण भाजपा में संगठन की दृष्टि से जिले की संरचना में किए गए बदलाव के बाद अलवर जिले में भाजपा के दो जिलाध्यक्ष होंगे। इनमें एक अलवर उत्तर और दूसरा अलवर दक्षिण होगा। भाजपा के अलवर उत्तर जिले में बानसूर, बहरोड़, मुण्डावर, किशनगढ़बास और तिजारा विधानसभा क्षेत्र को शामिल किया गया है। वहीं अलवर दक्षिण जिले में अलवर शहर, अलवर ग्रामीण, रामगढ़, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, थानागाजी और कठूमर को शामिल किया गया है।

भाजपा मण्डलों का भी होगा बंटवारा

अभी तक अलवर जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के 54 मंडल हैं। प्रदेश नेतृत्व की ओर से संगठनात्मक दृष्टि से अलवर जिले को दो भागों में बांटने के बाद विधानसभा क्षेत्र अनुसार पार्टी के मंडलों का बंटवारा भी होना तय है। इनमें अलवर दक्षिण में करीब 30 तथा अलवर उत्तर में करीब 24 मंडल रहने की संभावना है।

मोर्चा व प्रकोष्ठों का भी होगा विभाजन


भाजपा में 7 मोर्चा एवं करीब 10 प्रकोष्ठ हैं, भाजपा में दो जिले बनने के बाद अब मोर्चो व प्रकोष्ठों में भी संगठन की सत्ता बटवारा तय है। अब हर मोर्चा के जिले में दो जिलाध्यक्ष व प्रकोष्ठों में भी दो-दो जिलाध्यक्ष होंगे। वहीं मोर्चा व प्रकोष्ठों का संगठन भी नए सिरे से बनाया जाएगा।

उत्तर जिले पर ओबीसी, दक्षिण में एससी, एसटी भारी

भाजपा संगठन के दो जिले बनने के बाद अब उत्तर जिले पर ओबीसी वर्ग का दबदबा रहना तय है। उत्तर जिले में ज्यादातर क्षेत्र यादव बहुल है। इस कारण वहां भाजपा संगठन में भी यादवी राजनीति मुखर रहने की उम्मीद है। वहीं दक्षिण जिले के विधानसभा क्षेत्रों में राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ एसटी, अलवर ग्रामीण व कठूमर एससी, रामगढ़ व अलवर शहर सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हैं, लेकिन अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने से रामगढ़ की राजनीति का मिजाज अलग तरह का रहा है। यही कारण है कि भाजपा के दक्षिण जिले में एससी व एसटी का प्रभाव ज्यादा रहने की संभावना है।

पुलिस के जिलों की राह पर अब भाजपा भी

अलवर जिले को कानून व्यवस्था की दृष्टि से दो पुलिस जिलों में बांटा गया है। इनमें अलवर व भिवाड़ी पुलिस जिला शामिल है। अब भाजपा ने पुलिस जिलों की तर्ज पर संगठन को दो जिलो में बांटने का निर्णय किया है। खास बात यह कि भाजपा ने जिलों की सरंचना पुलिस जिलों में शामिल क्षेत्रों के आधार पर ही की है।

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