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बड़ों का सम्मान करने से आसान हो जाती हैं जीवन की राहें

Rajesh Mishra

Publish: Jul 13, 2019 18:19 PM | Updated: Jul 13, 2019 18:19 PM

Alirajpur

जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्र छात्राओं को आदर्श विद्यार्थी जीवन के बारे में बताया

आलीराजपुर. विद्यार्थी का उद्देश्य ज्ञान का अर्जन करना है। विभिन्न विषयों के अर्जित ज्ञान से ही उसकी पहचान होती है। एक आदर्श विद्यार्थी में ज्ञान के साथ-साथ उसके अंदर श्रेष्ठ मानसिक गुणों एवं मानवीय मूल्यों का होना आवश्यक है परंतु विद्यार्थियों का जिज्ञासु एवं कोमल मन संसार की अनेक बुराइयों की ओर आकर्षित हो जाता है। इससे वे अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं एवं नशीले पदार्थों के सेवन का शिकार हो जाते हैं। जीवन के सबसे ऊर्जावान कीमती समय को नष्ट कर देते हैं। मूल्य शिक्षा विद्यार्थियों के जीवन का मार्गदर्शन करके जीवन के मंजिल की राह को सहज बनाती है। यह बात इंदौर से आए धार्मिक प्रभाग के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्र छात्राओं को आदर्श विद्यार्थी जीवन के बारे में संबोधित करते हुए कही।
बड़ों का सम्मान करें
नारायण भाई ने बताया कि आदर्श विद्यार्थी का पहला लक्षण है उसे सदा लक्ष्य को निर्धारित करके ही आगे बढऩा चाहिए। लक्ष्य विहीन शिक्षा प्राप्त करना अनियंत्रित घोड़े के समान है जो केवल दौड़ता तो रहता है परंतु उसकी कोई दिशा नहीं होती है। परिस्थितियां तो स्वाभाविक रूप से प्रत्येक मनुष्य के जीवन में आती है, परंतु मानसिक दृढ़ता पूर्वक उनका सामना करते हुए लक्ष्य की ओर सदा गतिमान रहना चाहिए। ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन ने बताया कि आत्म बल और मानसिक दृढ़ता के आगे सभी समस्याएं और परिस्थितियां हार जाती हैं। विद्यार्थियों में सदैव स्वयं सीखने की प्रवृत्ति आवश्यक है। इससे जीवन में अनुभव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, माता-पिता एवं अन्य बड़े लोगों का सम्मान करना चाहिए। इससे उन्हें बड़ों का आशीर्वाद स्नेह प्राप्त होता है। इससे उनकी मंजिल आसान होती है। कार्यक्रम में वरिष्ठ अध्यापक मोहम्मद अशफाक ने सभी का आभार माना। इस अवसर पर अरुण गेहलोत,वरिष्ठ शिक्षक हल सिंह भी उपस्थित थे।
गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास के लिए पुंसवन संस्कार जरूरी
जोबट. मानवीय अंत:करण में सद्प्रवृत्तियों, सद्भावना के जागरण के लिए अखिल विश्व गायत्री परिवार यज्ञ संस्कारों का निरंतर आयोजन कर रहा है। यज्ञ संस्कार एक सूक्ष्म वैज्ञानिक प्रयोग है। इसके माध्यम से मनुष्य के व्यक्तित्व का कायाकल्प होता है। सोलह संस्कारों में सर्वप्रथम पुंसवन का विधान होता है। गर्भस्थ शिशु के शारीरिक, बौद्धिक तथा भावनात्मक विकास के लिए पुंसवन संस्कार किया जाता है। गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास के लिए पुंसवन संस्कार आवश्यक है। गायत्री शक्तिपीठ जोबट की महिला मंडल की कार्यवाहिका केशर राठौड़ के अनुसार इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करने के लिए गांव-गांव में पुंसवन संस्कार के आयोजन संपन्न करवाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ग्राम खट्टाली में पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। वरिष्ठ कार्यकर्ता सरोज टवली द्वारा बताया गया कि पंच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के दौरान दस गर्भवती महिलाओं के पुंसबन संस्कार किया गया। पंच कुंडीय गायत्री यज्ञ के दौरान दो पालियों में आयोजित यज्ञ में सैकड़ों महिलाओं-पुरुषों ने आहुतियां दी। गायत्री परिवार शाखा महिला मंडल की ममता गोयल, बबीता राठौड़, मंजू राठौड़, मनोज लढ्ढा, घनश्याम राठौड़ ने सराहनीय योगदान दिया।

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