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कलियुग का मानव गलत काम में लगा है : पं. शास्त्री

Rajesh Mishra

Publish: Jul 19, 2019 18:00 PM | Updated: Jul 19, 2019 18:00 PM

Alirajpur

भागवत कथा में सुनाई कलियुग और परीक्षित की कथा

आलीराजपुर. स्थानीय राठौड़ समाज धर्मशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन पंडित लोकेशानंद शास्त्री ने कलियुग की कथा सुनाते हुए कहा, कलियुग का मानव गलत काम में लगा हुआ है, यह कलियुग नहीं यह तो करयुग है। उन्होंने कहा, अगर मंदिर दूर लगे तो समझ जाना कि नर्क पास है। कथा के दौरान पंडित शास्त्री द्वारा परीक्षित जन्म की कथा सुनाई गई। वहीं भगवान सुखदेव के जन्म की कथा व नारद चरित्र सुनाया गया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे थे। कथा समापन के बाद भागवतजी की आरती उतारी गई व प्रसादी का वितरण किया गया।
मनुष्य और संत में अंतर
पंडित शास्त्री ने कहा, भागवत में 3 मंगलाचरण हैं। भागवत हमें जीवन के सूत्र बताती है। मंगलाचरण पहला सत्य, दूसरा धर्म और तीसरा कर्म। अगर हमारे जीवन में सत्य आ जाए तो फिर भगवान दूर नहीं हंै, भगवान जिसको भी मिलते हैं तो उसके स्वभाव देखकर ही कृपा करते हैं। वहीं स्वरूप को देखकर भगवान खुश नहीं होते, इसलिए मानव को अपना स्वभाव सुधारना चाहिए। कथा के दौरान परीक्षित जन्म की कथा सुनाई गई।
पंडित शास्त्री ने बताया, परीक्षित ने अपने जीवन मेंं अश्वमेघ यज्ञ किए। उन्होंने बताया, एक दिन कलियुग और परीक्षित में मुलाकात होती है और कलियुग परीक्षित से रहने का स्थान मांगता है। इस पर परीक्षित ने कलियुग को रहने के लिए 4 स्थान दिए। लेकिन कलियुग ने अच्छा स्थान मांगा तो परीक्षित महाराज ने छल-कपट से कमाए हुए धन में कलियुग को वास दिया। उन्होंने कहा, मनुष्य और संत में यही अंतर होता है कि मनुष्य दूसरे के सुख देखकर दुखी होता है और संत दूसरों के दु:ख देकर दुखी होता है।
‘चित्रों को दीवारों पर चित्रित करने से घर में आती है खुशहाली’
आलीराजपुर. एसपी विपुल श्रीवास्तव के निर्देश व एएसपी सीमा अलावा के मार्गदर्शन में पुलिस कर्मचारियों के परिवारजन विशेषकर महिलाओं एवं बालिकाओं में कौशल विकास उन्नयन हेतु राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से समन्वय कर क्षेत्र की मशहूर पिथोरा चित्रकला सिखलाई हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर पुलिस नियंत्रण कक्ष सभागार में आयोजित किया गया। इसमें पुलिस परिवार की महिला एवं बालिकाओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में देवीसिंह उंदलिया व नन्दु धनिया ग्राम डेहरी विकास खण्ड कठ्ठीवाड़ा ट्रेनर के रूप में शामिल हुए। शिविर में बच्चों को कार्ड सीट, स्केच पेन, कलर, पेंसिल व अनय प्रशिक्षण सामग्री विभाग की ओर से ही प्रदान की गई। इस अवसर पर एसपी विपुल श्रीवास्तव सपत्नीक उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि पिथोरा चित्रकला मप्र के झाबुआ-आलीराजपुर क्षेत्र से मानी जाती है। इस कला के विकास में भील जनजाति के लोगों का उल्लेखनीय योगदान है। पिथोरा चित्रकला का जनजातीय लोगों में विशेष महत्व है। प्राय: धार्मिक कार्यक्रम, शादी व त्योहारों के समय पिथोरा घरों की दीवारों पर चित्रकारी की जाकर देवी-देवताओं की तरह पूजा जाता है। उनका यह मानना है कि इस चित्रकला को घरों की दीवारों पर चित्रित करने से घर में शांति, खुशहाली व सौहार्द का विकास होता है। इस अवसर पर रक्षित निरीक्षक पुरुषोत्तम बिश्नोई, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन डीपीएम शीला शुक्ला, विश्वजीतसिंह कुशवाह, सुबेदार सुभाष सतपाडिय़ा, यातायात प्रभारी शिवम गोस्वामी तथा कंट्रोल रूम प्रभारी मनोरमा सिसौदिया उपस्थित थे।

 

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