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'गोपूजन से सभी देवों की हो जाती है पूजा’

Rajesh Mishra

Publish: Aug 08, 2019 17:56 PM | Updated: Aug 08, 2019 17:56 PM

Alirajpur

शिव महापुराण कथा में शिव-जलंधर युद्ध की सुनाई कथा, झूमकर नाचे श्रद्धालु

आलीराजपुर. गाय जगत की माता है। गाय में 33 कोटि देवताओं का वास है। एक गाय को पूजने से समस्त देवी-देवताओं की पूजा हो जाती है। गाय हमारे धर्म की जड़ है। जब तक जड़ है तब तक वृक्ष है। उसी प्रकार जब तक गोमाता सुरक्षित है, तब तक धर्म सुरक्षित है। हमारे लिए शर्म की बात है कि हम विवाहों में व अपने पर लाखों रुपए खर्च करते हैं। मंदिरो में छप्पन भोग का प्रसाद लगाते हैं और गोमाता भूखी भटक रही है। हम बंगलों-महलों में बैठे हैं। गाय धूप में तप रही, बरसात में भीग रही है। प्लास्टिक-पॉलीथिन खाकर मर रही है। हम पूरे परिवार को पालते हैं, किन्तु एक गाय नहीं पाल पा रहे हैं। हमारे घर से हम प्रतिदिन एक रोटी भी गाय के लिए नहीं निकाल पा रहे हैं। शानो-शौकत पर लाखों खर्च कर देते हैं। गोशाला हेतु दान नहीं दे पाते हैं। आयुर्वेद में भी गोमूत्र-गोबर का चिकित्सा में उपयोग बताया गया है। पंचगव्य बगैर पूजा-पाठ, हवन आदि कुछ भी संभव नहीं है। यह बात स्थानीय पंचेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही शिव महापुराण कथा में व्यसपीठ से पंडित शिवगुरु शर्मा ने कही।
दुखियों, जरूरतमंदों की सेवा और मदद करो
पंडित शर्मा ने मनुष्य के दु:ख पर चर्चा करते हुए बताया, मनुष्य की अनंत इच्छाएं ही दु:ख का कारण हैं। व्यक्ति की हर इच्छा पूरी नहीं होती है। मनुष्य दूसरों को देखकर दुखी है। हर व्यक्ति को कुछ न कुछ दु:ख अवश्य रहता है। कोई तन दुखी तो कोई मन दुखी, कोई संतान के लिए दुखी, संतान है तो दुखी है, नहीं है तो दुखी, कोई धन के लिए दुखी तो कोई पड़ोसी को सुखी देखकर दुखी। मनुष्य का मन नहीं भरता। कल झोपड़ी में सुखी था तो आज महल में भी सुखी नहीं। कभी फर्श बदलाता है, तो कभी रंग-रोगन, कभी फर्निचर बदलाता है। कोई क्या कहेगा इस पर भी मनुष्य दुखी हो जाता है। उन्होंने कहा कि दान करने से धन की शुद्धि होती है। दान करो मगर सामथ्र्य अनुसार दान करो, घर बेच कर तीरथ मत करो। दुखियों, जरूरतमंदों की सेवा करो, मदद करो, ईश्वर के आगे मस्तक झुकाओ, मांगो मत, उसे आपकी सभी आवश्यकता ज्ञात है, वह बिन मांगे देगा।
शिव जालंधर युद्ध जीवंत हो गया
कथा के दौरान सब सेठों में सावलिया सेठ बाकी सब डुप्लीकेट कहते हुए प्रभुलीला का वर्णन करते हुए शिव जलंधर युद्ध की कथा सुनाई गई। शिवजी द्वारा जलंघर वध का चित्रण झांकियों से किया गया। शिव व जलंधर पात्र की आकर्षक रचना सुंदर शृंगार माली समाज की चांदनी, सीमा, रंजना, मंजुला, संगीता ने किया। पंडाल में शिव जलंधर युद्ध जीवंत हो गया। आरती एवं प्रसादी की व्यवस्था मुख्य यजमान परिवार सागर वंशीय माली समाज, राठौर महिला मंडल ने की। इस दौरान पंडित शिवगुरु का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर पंडित शर्मा द्वारा सुनाए गए भजनों पर उपस्थित श्रद्धालुगण झूमकर नाचने लगे। उक्त जानकारी कार्यक्रम की व्यवस्था संयोजन नियंत्रण निरंजन मेहता ने दी।

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