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Facilities: कॉलेज खुद नहीं अपडेट, सुविधाएं तो लक्षद्वीप जितनी दूर

raktim tiwari

Publish: Sep 11, 2019 09:22 AM | Updated: Sep 11, 2019 09:22 AM

Ajmer

जहां खेल मैदान, कंप्यूटर लेब, सभागार और अन्य सुविधाएं नहीं थी। पिछले महीने यह 6.5 करोड़ से लोहागल गांव में बने नए भवन में शिफ्ट हो चुका है।

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

राज्य में विधि (law education) और संस्कृत शिक्षा (sanskrit education) की धज्जियां उड़ रही हैं। इसका असर कॉलेज के विकास और विद्यार्थी सुविधाओं पर पड़ रहा है। इन कॉलेज में ना स्पोट्र्स ना कंप्यूटर लेब (computer lab)-हाइटेक लाइब्रेरी (libray) और कैंटीन (canteen) सुविधाएं हैं। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर का शोध-कार्यशालाएं नहीं होने से ऑल राउंडर विद्यार्थी नहीं निकल रहे हैं।

प्रदेश में 2005-06 में 15 लॉ कॉलेज (law college ajmer) स्थापित हुए। इनमें अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर, नागौर, सिरोही, बूंदी, कोटा, झालावाड़ और अन्य कॉलेज शामिल हैं। किसी भी कॉलेज को बार कौंसिल ऑफ इंडिया (bar council of india) से स्थाई मान्यता (permanent affilliation) नहीं मिल पाई है। सभी कॉलेज को प्रतिवर्ष संबंधित विश्वविद्यालय का सम्बद्धता पत्र, निरीक्षण रिपोर्ट और पत्र भेजना पड़ता है। इसके बाद प्रथम वर्ष (first year) के दाखिले होते हैं। इसी तरह शहर में करीब 52 साल से राजकीय आचार्य संस्कृत कॉलेज (sanskrit college) संचालित है। पहले यह गंज स्थित छोटे से भवन में चलता था। जहां खेल मैदान, कंप्यूटर लेब, सभागार (auditorium) और अन्य सुविधाएं नहीं थी। पिछले महीने यह 6.5 करोड़ से लोहागल गांव में बने नए भवन में शिफ्ट हो चुका है।

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यूजीसी नहीं जानता लॉ कॉलेज को
यूजीसी के नियम 12 (बी) और 2 एफ के तहत सभी कॉलेज (college) और विश्वविद्यालयों (universities) को पंजीकृत किया जाता है। इसके आधार पर उनकी यूजीसी (UGC) में पहचान होती है। यह पंजीयन संस्थाओं में शैक्षिक विभाग, शिक्षकों और स्टाफ की संख्या, भवन (building), संसाधन (facilities), सह शैक्षिक गतिविधियों और अन्य आधार पर होता है। लॉ कॉलेज इस नियम में पंजीकृत नहीं है। संस्कृत कॉलेज जरूर पंजीकृत है।

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नहीं है कॉलेज में यह सुविधाएं
-दूसरे कॉलेज-यूनिवर्सिटी की तह यूजीसी से नहीं मिल रहा बजट
-दोनों कॉलेज में राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय शोध की कमी
-राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार का नहीं आयोजन
-हाइटेक कंप्यूटर लेब, स्मार्ट क्लास की कमी
-मिनी ऑडिटोरियम और इंडोर-आउटडोर खेल मैदान

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शिक्षकों-विद्यार्थियों पर यह असर...
-दूसरे कॉलेज की तुलना में विद्यार्थियों को नहीं हाइटेक सुविधाएं
-राज्य और देश के अन्य संस्थानों नहीं होता एक्सेंज प्रोग्राम
-नहीं हो रही नियमित कार्यशाला और कॉन्फे्रंस
-संस्कृत और विधि क्षेत्र में विद्यार्थी नहीं बन पा रहे ऑल राउंडर

शिक्षक भी नहीं पर्याप्त
विधि शिक्षा में महज 125 व्याख्याता कार्यरत हैं। जबकि राज्य में 15 लॉ कॉलेज संचालित हैं। इनमें से कई व्याख्याता अपने सियासी रसूखात के चलते विश्वविद्यालयों और कॉलेज शिक्षा निदेशालय में पदस्थापित हैं। नागौर, सिरोही, बूंदी, झालावाड़ लॉ कॉलेज (law college) में पर्याप्त शिक्षक नहीं है। संस्कृत शिक्षा कॉलेज में तो प्रदेश में महज 80 शिक्षक कार्यरत हैं। भर्तियां और पदोन्नतियां भी ठप हैं।

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रूसा और यूजीसी की अन्य योजनाओं में बजट नहीं मिल रहा है। नैक ग्रेडिंग कराने के बाद हम इनका लाभ उठा सकेंगे।
डॉ. विनय झा, प्राचार्य संस्कृत कॉलेज