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VIDEO: अस्पतालों का बाजार, यहां ठेके पर होता है इलाज, लील चुका है कई जिंदगी

Dhirendra yadav

Publish: Jul 18, 2019 18:01 PM | Updated: Jul 18, 2019 18:01 PM

Agra

दो वर्ष में चिकित्सा विभाग ने 35 मुकदमे कराए दर्ज।
बेसमेंट में चलता है आईसीयू, झोलाछाप कर रहे इलाज।

आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार नये आदेश जारी कर रही है, इसके बाद भी आए दिन अस्पतालों में लापरवाही के चलते मरीजों की मौत होने के मामले सामने आ रहे हैं। कहीं झोलाछाप चिकित्सक इलाज करते पकड़े जा रहे हैं, तो कहीं बिना डॉक्टर के स्टाफ द्वारा ऑपरेशन तक कर दिए जाते हैं। अब आगरा की बात करें, तो पूरे आगरा को डॉक्टरों की मंडी कहा जाता है, तो वहीं आगरा का सबसे बड़ा अस्पताल बाजार यमुना पार क्षेत्र ट्रांस युमना कॉलोनी को माना जाता है। यहां हताश-परेशान मरीज़ और उनके रिश्तेदार एक अस्पताल से दूसरे अस्तपाल भागते नज़र आते हैं।

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ठेके पर होता है इलाज
ट्रांस युमना कॉलोनी के इस अस्पताल बाजार में दो किलोमीटर के दायरे में 75 के आस पास लाइन से अस्पताल हैं। खास बात ये है कि यहां पर ठेके पर इलाज होता है। ठेके की रकम अस्पताल में आने से पहले ही तय हो जाती है। ऑपरेशन से डिलेवरी का चार्ज 15 से 20 हजार रुपये है। इसमें मरीज लाने वाले का कमीशन भी तय होता है। वहीं एक्सीडेंटल केस में भी कमीशन का खेल चलता है। हर दिन के हिसाब से कमीशन मिलता है। यानि एक दिन यदि मरीज अस्पताल में भर्ती रहता है, तो एक दिन के अस्पताल के बिल का 10 फीसद हिस्सा अस्पताल में मरीज लाने वाले शख्स का होता है।

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एंबुलेंस चालक रहते हैं सक्रिय
इन अस्पतालों के संपर्क में एंबुलेंस चालक होते हैं, जिनकी नजर मरीजों पर होती है। एटा, फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, हाथरस, मैनपुरी, कासगंज से सर्वाधिक संख्या में आने वाले मरीजों को इन्हीं अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। कारण है यहां से मरीज जो भी एंबुलेंस करके लाते हैं, तो जानकारी के अभाव में उस एंबुलेंस वाले से ही कहते हैं, कि अच्छे अस्पताल ले चलो, या फिर मरीज के परिजन कहीं भी जाना चाहें, तो एंबुलेंस चालक अपने कमीशन वाले अस्पताल में इन मरीजों को ले जाने की कोशिश में लगे रहते हैं। कारण है कि हर मरीज पर इन्हें अस्पताल से कमीशन के रूप में 1 हजार रुपये मिलते हैं।

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ये है अस्पतालों का हाल
आगरा की बात करें, तो यहां 2 हजार 603 अस्पताल पंजीकृत हैं। ट्रांस यमुना में बड़ी संख्या में अस्पताल चल रहे हैं। इनका सही आंकड़ा किसी के पास नहीं है। इस क्षेत्र में चल रहे अस्पताल खुलेआम नियमों का उल्लंघन करते हैं। बेसमेंट में आईसीयू चल रहे हैं। साफ सफाई के नाम पर कुछ भी नहीं है। यहां एक-एक डॉक्टर के नाम 20-20 अस्पतालों के दस्तावेज़ों में लगे हैं।

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35 मुकदमे हुए दर्ज
पत्रिका टीम ने जब इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश वत्स से बात की, तो उन्होंने बताया कि दो वर्ष में यमुना पार क्षेत्र के हॉस्पीटल के मामले में 35 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में बहुत अधिक शिकायतें आती थीं, जिसके बाद एक पोर्टल लांच किया गया। इसके माध्यम से सभी पंजीकृत डॉक्टर और उनके नाम पर पंजीकृत हॉस्पीटल की जानकारी इस पोर्टल पर अपलोड कर दी गई। ये पोर्टल ऐसे मामलों को पकड़ने में सक्षम हैं, जिनमें एक चिकित्सक के नाम पर दो अस्पताल चल रहे हों। इस व्यवस्था के बाद शिकायतें काफी हद तक कम हुई। आज भी यदि ऐसी कोई शिकायत आती है, तो चिकित्सा विभाग तत्काल कार्रवाई करता है।