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Pakistan में बांझपन के इलाज में IVF का खर्चा 5 लाख, India की बात सुनकर मुस्करा उठेंगे

Dhirendra yadav

Publish: Aug 19, 2019 07:28 AM | Updated: Aug 19, 2019 07:28 AM

Agra

-पुरुष के एक साल के सिगरेट, तम्बाकू, शराब से सस्ता
- युवा इसार-2019 में देश के नाम छोड़ा एक झकझोरने वाला संदेश
- निसंतानता पर हुई खुली चर्चा, पुरुषों को समझना जरूरी

आगरा। वे औरतें जिनकी गोद शादी के सालों बाद भी सूनी रहती है, अपनी ममता को आंसुओं के माध्यम से अभिव्यक्त कर वे दिन-रात अपनी गोद में नन्हें शिशु की अठखेलियां देखने के सपने संजोती रहती हैं। 'बांझ' इसी नाम की उलाहना सहते-सहते वे या तो अपना मानसिक संतुलन खोने लगती हैं या उनको पति की दूसरी शादी के नाम पर धमकाया जाता है। इस बीच आईवीएफ (IVF) एक उम्मीद की किरण के रूप में नजर आता है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे समझना नहीं चाहते।

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Dr jadeep malhotra

आईवीएफ के उपकरण महंगे
आगरा में आयोजित आईवीएफ (IVF) विशेषज्ञों के सम्मेलन युवा इसार-2019 के अंतिम दिन एक ऐसी चर्चा हुई, जिसने आदमी हो या औरत, युवा हो या बुजुर्ग सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। कई सालों से निरंतर निसंतानता का दर्द सहती आ रहीं कई महिलाओं की आंखों से आंसू छलक आए। मंच से अपना उद्बोधन देते हुए इसार की अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा (Dr jaidep malhotra) ने कहा कि सेरोगेसी अथवा टेस्ट ट्यूब बेबी (Test tube baby) के रूप में निसंतान दंपतियों (Infertility) को एक नया विकल्प मिला है। कहने-सुनने में बड़ा असहज लगता है जब कोई पुरुष कहता है कि आईवीएफ बहुत महंगा है। क्या कभी उन्होंने खुद से पूछा कि क्या ये एक मर्द की एक साल की बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू या दूसरे शौकों से भी महंगा है। जब आईवीएफ सफल होता है और कुछ महीने बाद आप अपनी गोद में एक बेटे या बेटी को खिलाते हैं, उसे पढ़ने भेजते हैं, अपने आंगन में खेलता हुआ और बड़ा होता हुआ देखते हैं, क्या तब भी आपको यह महंगा लगता है। यह हालात तब हैं जब यही आईवीएफ जो भारत (India) में एक से डेढ़ लाख के बीच होता है वो इंडोनेशिया में सात लाख, पाकिस्तान (Pakistan) में पांच लाख, थाईलैंड में आठ लाख और अमेरिका (America) में लोग 15 लाख रूपये में करा रहे हैं। यह समझना बेहद जरूरी है कि आईवीएफ पर जो खर्च हो रहा है उसके लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं और उपकरण इस्तेमाल होते हैं। यह डॉक्टर के हाथ में नहीं है कि वह अपनी जेब से पैसा लगाए और आपके लिए खर्च को कम कर दे।

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Dr jadeep malhotra

बांझपन औरत और मर्द दोनों की समस्या

डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि मर्द हो या औरत बांझपन दोनों की ही समस्या है। लेकिन कभी कोई एक पुरूष को बांझ नहीं कहता, लेकिन महिला को यह उलाहना बार-बार सहना पड़ता है। हालांकि बांझपन महिला और पुरूष दोनों की ही समस्या है। ये बात और है कि मर्द इसे जान लें और मानें न। वैज्ञानिक कारणों से स्पष्ट हो चुका है दोनों इसमें 50-50 फीसद के हिस्सेदार हैं। कई बार कमी पुरुष में होती है, लेकिन वह जांच नहीं कराते, जबकि पुरुष बांझपन की जांच आसानी से हो सकती है। दूसरी ओर महिला के लिए यह कष्टकारी बन जाता है। इससे पूर्व तकनीकी सत्रों में अंतिम दिन भी चर्चा हुई। देश-दुनिया से आए विशेषज्ञों ने निसंतानता से जुडे़ तमाम पहलुओं, शोध कार्यों को सामने रखा।

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